आंगनबाड़ी केंद्रों को अधिकारी गोद लेंगे और उन्हें विकसित कराने का कार्य करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को कुपोषण मुक्त करना, आधारभूत सुविधाओं को प्रदान कराना है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कुमार पांडेय ने बताया कि गर्भधारण से दो वर्ष तक की अवधि अर्थात जीवन के प्रथम 1000 दिवस पोषण की दृष्टि से बच्चों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बच्चों के 90 प्रतिशत मस्तिष्क का विकास जन्म से दो वर्ष तक तेजी से होता है। आंगनबाड़ी केंद्र न सिर्फ पोषण एवं स्वास्थ्य का केंद्र है बल्कि तीन से छह वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा देने का स्थल भी है। बच्चों के पोषण स्वास्थ्य एवं मानसिक स्तर की वृद्धि में आंगनबाड़ी केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी के दृष्टिगत आंगनबाड़ी केंद्रों को आदर्श केंद्र बनाने के उद्देश्य से शासन ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को पत्र भेजा है।
बताया कि यह योजना 10 जनवरी से शुरू होगी। इसको लेकर विभाग की ओर से सैम और मैम बच्चों की सूची तैयार कर जिला पोषण समिति के सामने प्रस्तुत करना है। सैम और मैम बच्चों वाले केंद्र को प्राथमिकता देते हुए गोद लेने की प्रक्रिया की जाएगी। गोद लिए जाने वाले केंद्र की सूची जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी और उनसे विचार-विमर्श कर उनकी स्वीकृति पर गोद लिए जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र चयनित किए जाएंगे। इसके साथ ही बीडीओ, सीडीपीओ सहित जनपद स्तरीय अधिकारियों को गोद लिए जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र आवंटित किए जाएंगे। जिले के जनप्रतिनिधि एवं जिलास्तर अधिकारी द्वारा तीन आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया जाएगा।