गाजीपुर। ग्रामीणों श्रमिकों को गांव में ही रोजगार देने के उद्देश्य से संचालित मनरेगा (अब वीबीजीरामजी) महज दिखावा साबित हुई। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में जिले में महज 0.72 प्रतिशत जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिन का काम मिल पाया है। 3.34 लाख जॉबकार्ड धारकों में से सिर्फ 1213 को इसका लाभ मिल पाया है। यानी रोजगार की गारंटी जिले में एक प्रतिशत भी पूरी नहीं हो सकी।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर तक करीब नौ महीने के दौरान मनरेगा के तहत लगभग 59 लाख मानव दिवस सृजित किए गए, जबकि लक्ष्य 91 लाख मानव दिवस का है। वहीं, 100 दिन के रोजगार की गारंटी अधिकांश श्रमिकों के लिए सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई।
जिले में कुल 3,34,110 जॉबकार्ड धारक पंजीकृत हैं। इनमें से 1,67,398 श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी। विभाग की ओर से 1,67,365 श्रमिकों को काम तो दिया गया, लेकिन सिर्फ 1213 जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिन का रोजगार नसीब हो सका। यह आंकड़ा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की हकीकत को आईना दिखा रहा है। संवाद
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महिलाओं और एससी-एसटी को भी अधूरा लाभ
कुल रोजगार पाने वालों में महिला परिवारों की संख्या 80,797 रही, जो लगभग 48 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति व जनजाति के 37,766 परिवारों यानी 23 प्रतिशत को ही रोजगार मिल पाया। यह तब है, जब इस योजना को महिलाओं और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के तौर पर पेश किया जाता रहा है।
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मरदह ब्लॉक में सिर्फ दो को मिला 100 दिन का काम
मनरेगा में लापरवाही की सबसे बड़ी तस्वीर मरदह ब्लॉक में देखने को मिली, जहां महज दो जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार मिल सका। जमानियां और बाराचंवर में सात-सात, बिरनो में 12, गाजीपुर सदर में 17, मनिहारी में 18 और करंडा में 19 श्रमिकों को ही इसका लाभ मिला है।
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जखनिया सबसे आगे, फिर भी आंकड़े चिंताजनक
जिले के 16 विकास खंडों में जखनिया विकास खंड में सबसे अधिक 241 जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार मिला। इसके बाद देवकली में 214, भांवरकोल में 173, सादात में 143, भदौरा में 94, सैदपुर में 82, कासिमाबाद में 77, रेवतीपुर में 55 और मोहम्मदाबाद में 52 श्रमिकों को ही पूरा रोजगार मिल पाया।
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जिम्मेदारों पर उठे सवाल
मनरेगा के ये आंकड़े ग्राम पंचायत स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक तैनात पंचायत सचिवों, रोजगार सेवकों, खंड विकास अधिकारियों और श्रम एवं रोजगार विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। श्रमिकों के कल्याण के लिए बनी योजना में इतनी बड़ी चूक प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है।
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ये आंकड़े भी देखें
-कुल जॉबकार्ड धारक: 3,34,110
-रोजगार मांगने वाले: 1,67,398
-रोजगार पाने वाले: 1,67,365
-100 दिन का रोजगार पाने वाले: 1213
-महिला परिवार: 80,797
-एससी/एसटी परिवार: 37,766
-मानव दिवस सृजित: 59 लाख
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खंड विकास अधिकारियों और रोजगार सेवकों की लापरवाही के कारण सात ब्लॉकों में जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार नहीं मिल सका है। मामले की जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - विजय यादव, उपायुक्त मनरेगा।