गाजीपुर। वाराणसी में आतंक का पर्याय और मुख्तार गैंग के सक्रिय सदस्य मेराज खां पर गाजीपुर में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं है। बीस वर्ष पूर्व माता-पिता एवं पांच भाई के साथ वह गांव छोड़कर वाराणसी चला गया था। चित्रकूट में हत्या की सूचना मिलते ही ईद की खुशियां काफूर हो गई। वहीं पैतृक गांव में सन्नाटा पसर गया।
करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के महेंद गांव निवासी मेराज खां अपने पांच भाइयों में चौथे नंबर पर था। उसके पिता जमालुद्दीन खां का छह वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका है। वाराणसी में मछली व्यवसाय करने से मछली मंडी तक वसूली का काम करता था। सूत्रों की माने तो मेराज आपराधिक घटनाओं से लेकर ठेके-पट्टे तक का लेखाजोखा रखता था। वह मुख्तार गैंग का सक्रिय सदस्य था।
क्षेत्र के लोगों की मानें तो वह पांच वक्त का नमाजी था। मेराज के बड़े भाई निजामुद्दीन खां पुलिस में सिपाही के पद से सेवानिवृत्त हैं। दूसरे भाई कलामुद्दीन रेलवे में, तीसरे नंबर के सलामुद्दीन पुलिस महकमे से सेवानिवृत्त हैं। वहीं पांचवां सेराज पुलिस महकमे में सिपाही के पद पर तैनात है। इसके पैतृक गांव स्थित मकान पर ताला लटका हुआ है। इधर उसकी हत्या की सूचना मिलते ही पैतृक गांव में मातमी सन्नाटा छा गया।
एसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि चित्रकुट के जेल में शुक्रवार को मेराज की हत्या की जानकरी है। उसके खिलाफ जिले के किसी थाने में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है।