गाजीपुर। मरदह ब्लाक के सिंगेरा गांव में विकास कार्य के नाम पर हुए गड़बड़झाले की जांच के बाद भीह अब तक सचिव और ग्राम प्रधान पर कोई कार्रव्राइ नहीं हुई हे।
एक सप्ताह पहले डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ के नेतृत्व में हुई जांच में ग्राम पंचायत सचिव द्वारा लाखों रुपये बिना वित्तीय स्वीकृति के खर्च करने का मामला भी प्रकाश में आया था। जिला पंचायत राज अधिकारी ने सचिव को निलंबित करने और ग्राम प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इधर ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा आनन-फानन में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है।
मालूम हो कि गांव में 366 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसे कागजों में निर्मित दिखाकर 43 लाख 92 हजार रुपये उतार लिए गए थे। जबकि इसकी हकीकत तो यह थी कि शौचालय का निर्माण कराया ही नहीं गया था। शिकायतकर्ता द्वारा जब उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत की गई तो डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ के नेतृत्व में टीम जांच करने गांव पहुंची। वहां छानबीन में पता चला कि शौचालय का निर्माण कराया ही नहीं गया है। यहीं नहीं गांव में हुए विकास कार्य भी मानक के मुताबिक नहीं मिले। जांच के दौरान गांव के सैकड़ों लोगों की भीड़ मौके पर जुटी हुई थी। ग्रामीण जांच में भ्रष्टाचार के उजागर होने से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के प्रति आश्वस्त थे, लेकिन आठ दिन बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई न होने एवं ग्राम प्रधान एवं सचिव द्वारा तेजी के साथ चोरी छिपाने की गरज से गांव में अब तक कागज में निर्मित दिखाए गए शौचालयों सहित अन्य निर्माण कार्य कराने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों में जांच में लीपापोती की आशंका से आक्रोश व्याप्त है। शिकायतकर्ता रामबली सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि भ्रष्टाचार पर लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो ब्लाक मुख्यालय से लेर जिला मुख्यालय तक ग्रामीण न्याय के लिए आंदोलन को बाध्य होंगे। इस संबंध में डीपीआरओ अनिल सिंह ने बताया कि शौचालय निर्माण कराने से भी रिपोर्ट में कोई बदलाव नहीं होगा। गांव में बनी सड़कों की तकनीकी टीम की तरफ से एक बार फिर जांच कराई जाएगी। इस मामले में सचिव और ग्राम प्रधान पर निश्चित तौर से कार्रवाई होगी।