गांव की सांस्कृतिक धरोहर की सूचना को अब मोबाइल में कैद किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय और सीएससी के बीच पिछले दिनों अनुबंध किया जा चुका है। जनपद में यह योजना सभी गांवों की सांस्कृतिक सूचना विशेष मोबाइल एप के जरिए एकत्र करने का काम कामन सर्विस सेंटर संचालकों द्वारा सर्वे कर किया जा रहा है। इस क्रम में जिला स्तर पर सीएससी संचालकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मेरा गांव मेरी धरोहर नाम से यह जाना जाएगा।
जिला प्रबंधक शिवानंद उपाध्याय ने बताया कि जिले में कुल 3380 गांव का सर्वे किया जाना है, जिसमें अभी 300 गांव पूर्ण कर लिया गया है। इस कार्य को गति देकर 30 मई तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसी क्रम में मंगलवार को भांवरकोल के शेरपुर ग्राम में होने वाले सर्वे की जांच की गई जो केंद्र संचालक द्वारा की जा रही थी उसे सही पाया गया। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत सीएससी कॉमन सर्विस सेंटर और केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय के साझा सहयोग से पहली बार यह कार्य किया जा रहा है। इसको मेरा गांव मेरी धरोहर नाम दिया गया है। इससे सीधा आशय है कि गांव की विरासत के इस सर्वे के दौरान नौ विशेष बातों को दर्ज किया जाना है। बताया कि सांस्कृतिक शब्द से सीधा मतलब है कि कोई ऐसी चीज जिसमें कुछ विशेष हो या वह पुरानी हो। सरकार ऐसी सभी चीजों को इकट्ठा कर इन चीजों के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहती है। इसमें गांव के नागरिकों के सहयोग से गांव, ब्लाक एवं जिले को विशेष बनाती है उसकी खासियत को दर्ज किया जाएगा। साथ ही उससे संबंधित फोटो, वीडियो और उसके बारे में संपूर्ण जानकारी भी अपलोड की जाएगी। जिला प्रबंधक ने बताया कि सर्वे के दौरान गांव के कम से कम पांच लोगों से कुछ जानकारी लेकर दर्ज करना है जिसमें गांव की क्या खास पहचान है, गांव की खास सांस्कृतिक पहचान, वहां के प्रसिद्ध स्थान, प्रसिद्ध किवदंती, प्रसिद्ध व्यक्ति, विशेष पकवान, विशेष आभूषण आदि के बारे में जानकारी दर्ज की जानी है।