जमानिया क्षेत्र के लटिया गांव में रविवार को सम्राट अशोक क्लब की ओर से 19
वां लटिया महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें दूर-दराज से आए लोगों ने
बढ़चढ़ कर भाग लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का आगाज इलाहाबाद
हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सभाजीत यादव ने लटिया लाट पर पंचशील दीप
प्रज्जवलित करके किया। बुद्ध को नमन कर वह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस
दौरान तिरंगे झंडे के साथ ही पंचशील ध्वज तथा सम्राट अशोक के ध्वज के साथ
ही क्लब के झंडे का ध्वजारोहण किया गया।
अतिथियों की ओर से मंच पर स्थापित
सम्राट अशोक, जगदेव बाबू व भगवान बुद्ध आदि के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प
अर्पित किया गया। इसके बाद पंचशील दीप जला कर सम्राट अशोक क्लब के
संस्थापक सुभाष सिंह मौर्य ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस दौरान भारत का
राष्ट्रीय धर्मग्रंथ, भारतीय संविधान विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित
करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतीय संविधान ही भारत की राष्ट्रीय
पुस्तक है। इस संविधान से ही भारत के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों एव
कर्तव्यों की सुरक्षा है। संविधान को लागू हुए 65 वर्ष हो गए, लेकिन अब तक
इसे धरातल पर लागू नहीं किया जा सका।
भारतीयों का आर्थिक, सामाजिक,
राजनैतिक अधिकार भारतीय संविधान ही प्रदान करता है। इस दौरान राष्ट्रीय
प्रवक्ता तथा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा. सच्चिदानंद मौर्य ने कहा कि
भारतीय संविधान का अभी तक पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। इसी
वजह से भारत में तमाम सामाजिक, आर्थिक एंव राजनैतिक विषमताएं हैं। विशिष्ट
अतिथि एडवोकेट प्रहलाद मौर्य व एडवोकेट रामेश्वर पवन, प्रो. मनोज कुमार,
सम्राट अशोक क्लब के दिल्ली प्रवक्ता शत्रुघ्न सिंह शाक्य ने भी विचार
व्यक्त किए।
सम्राट अशोक बुद्ध विहार सारनाथ के भंते अशोक मित्र, धमरश्रण
ने भागवान बुद्ध के मंत्राें का उच्चारण कर उपस्थित लोगों को अनुसरण कराया व
धम्म के बारे में तथागत बुद्ध ने मानवता के सिद्धांत , पंचशील के बारे
में विस्तार से प्रकाश डाला। इसके साथ ही पंचशील वंदना भी कराई।
इस मौके
राजेश कुशवाहा, दिनेश मौर्य, मनोज मौर्य, सत्य नारायण मौर्य, वरूण मौर्य,
डां आर पी सिह, मणी कान्त मौर्य, सिंहासन सिंह कुशवाहा, निरज, राम प्रभाव,
ज्ञान चंद, मुन्नी लाल, सुनील, रूदल, लखनऊ सिंह, तुल्सी आदि हजाराें लोग
मौजूद रहे। क्लब के राष्ट्र्रीय अध्यक्ष दीनानाथ मौर्य ने आभार व्यक्त
किया। कार्यक्रम का संचालन डा. सच्चिदानंद मौर्य ने किया।