अपनी गायकी से देश-दुनिया में ख्याति पा रही गायिका चंदन तिवारी भोजपुरी गीतों से कटे संभ्रांत तबके को फिर से जोड़ने की कोशिश में लगी हैं। गंगा जगाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर चंदन का गीत ‘नदिया धीरे बहो’ जिसमेें वे नदी की पीड़ा बयां करने के साथ उसे बचाने की अपील भी करती हैं बेहद लोकप्रिय हुआ है। रोडवेज स्थित पैलेस में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं लोककला प्रदर्शनी में शिरकत करने आईं चंदन तिवारी ने शनिवार को अमर उजाला से खास बातचीत में अपनी गायकी के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया।
बिहार के आरा के बड़का गांव निवासी लल्लन तिवारी एवं रेखा तिवारी की पुत्री चंदन बताती हैं कि गायकी में उनकी रुचि बचपन से ही रही। मां की लोक गायकी से प्रेरित होकर उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा। दूरदर्शन, आकाशवाणी, ई-टीवी, महुआ, बिग मैजिक टीवी के साथ कई निजी एफएम में नियमित प्रस्तुति देने वाली चंदन का खास शो 'पुरबिया तान' जबरदस्त रूप से हिट रहा है।
बकौल चंदन पुरबिया तान के तहत वे बेटी चिरैया के समान, वॉयस ऑफ गंगा-वॉयस फॉर गंगा, राधा रसिया, भिखारीनामा, महेंद्र मिसिर के गीतों को लेकर पुरबिया उस्ताद, निर्गुनिया राग, बसंती बयार, किसान गीत, नदी गीत, बाल गीत, जनगीत आदि की पूरी शृंखला तैयार कर रही हैं।
वे कहती हैं कि भोजपुरी के एक से एक मीठे और मधुर गीत समय के थपेड़े में गुम हो चुके हैं। इन्हें खोजने सजोने का काम लगातार कर रही हूं मेरा प्रयास है कि इन्हें उसी मधुरता के साथ प्रस्तुत करूं जो भाव इनके मूल में था। अपराजिता सम्मान, झारखंड नागरिक सम्मान, गाजीपुर का लोक सम्मान जैसे महत्वपूर्ण सम्मान पा चुकी चंदन साफ कहती हैं कि भोजपुरी के नाम पर हाल की फिल्मों में जो कुछ परोसा गया उसने भोजपुरी की छवि खराब की है। वे अपनी गायकी से अश्लील गीतों के खिलाफ अभियान चला रही हैं।
इसके अलावा आईआईटी मुंबई के कविश सेठ के साथ मिलकर जुबान पुरबिया तान नाम से पारंपरिक नदी गीतों के साथ फ्यूजन कर रही हैं। इंडिया हैबिटेट सेंटर, बीएचयू के 100 वर्ष होने पर भारत भवन में ‘पुरबिया तान’ का खास शो कर चुकी चंदन शास्त्रीय और लोक गीतों का मिलान करा रही हैं तथा गांव के ठेठ कलाकारों के संग विलुप्त विधाओं पर नए तरह के प्रयोग कर रही हैं। आगे की योजना के बाबत वे बताती हैं कि गांव के छात्रों के बीच लोककथा गीतों को लेकर जानेवाली हूं।