मालगोदाम स्थित पैलेस में जीवनोदय शिक्षा समिति द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पुस्तक का विमोचन करते प्रदेश के धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री विजय मिश्र साथ में अन्य लोग।
जीवनोदय शिक्षा समिति की ओर से रोडवेज स्थित एक पैलेस में दो दिवसीय राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद: बहुलतावादी निर्मिति विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति डा. पृथ्वीश नाग ने कहा कि यूरोपीय अवधारणा से भारतीय राष्ट्रवाद को नहीं समझा जा सकता है। ब्रिटिश शासन से पहले भी भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की समझ थी और भारत सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से जुड़ा हुआ था। हमारी संस्कृति जोड़ने की है, न कि तोड़ने की।
उन्होंने कहा कि हमारी वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है। जो एक राष्ट्र, एक भाषा एक संस्कृति में नहीं बंध सकती है। योगेश प्रताप शेखर ने कहा कि भारत की कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं बन सकती है। भारत में राष्ट्र भाषाएं हो सकती हैं। डा. संतोष सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक की फिल्मों में राष्ट्रीय चेतना को रेखांकित किया। अतुल ठाकुर ने राष्ट्रवाद को एक नैसर्गिक प्रक्रिया बताया।
नलिन श्याम कामिल ने कहा कि लोक एवं लोक संस्कृति को समझने से राष्ट्र समृद्ध होगा। डा. समर बहादुर सिंह ने कहा कि आर्थिक साम्राज्यवाद को तोड़ने से ही राष्ट्र बच सकता है। कमलाकर त्रिपाठी ने गांधीवादी राष्ट्रवाद को आवश्यक बताया। इस अवसर पर बालेश्वर विक्रम ने भी विचार व्यक्त किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में चंदन तिवारी ने आकर्षक लोकगीत प्रस्तुत किए।
चित्रकला प्रदर्शनी में किरन भारद्वाज, निकिता गुप्ता, राहुल तिवारी, शिवनाथ, डेविड, हरेंद्र ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में डॉ. रामनारायण तिवारी, डॉ. जितेंद्रनाथ राय, डॉ. कुलदीप पांडेय, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. कुंवर भानूप्रताप सिंह, अनिल कुमार शर्मा, काजी फरीद आलम, प्रभाकर त्रिपाठी, प्रत्यूष, धर्मेंद्र, उत्कर्ष उपस्थित थे। संचालन रविंद्र श्रीवास्तव और आभार अमरजीत यादव ने व्यक्त किया।