पंचायत भवनों के पड़ताल की खबर में....बिरनो ब्लॉक के केलही स्थित पंचायत भवन में लटका ताला-संवाद
गाजीपुर। गांव में ही लोगों को जरूरी सुविधाएं मिले। इसके लिए जिले की 1238 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बनाए गए। वर्तमान में 50 फीसदी यानी 619 पंचायत भवनों पर ताले लटक रहे हैं। सिर्फ कागजों में गांव की सरकार चल रही है। पंचायत भवनों के बंद रहने से ग्रामीण प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं। साथ ही विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये से पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को सहूलियत मिल सके। उनका आय, जाति, निवास, मृत्यु सहित अन्य प्रमाण-पत्र स्थानीय स्तर पर ही बन जाएं। उन्हें ब्लॉक व तहसील का चक्कर न लगाना पड़े। लेकिन, पंचायत भवनों के बंद रहने के कारण इस उद्देश्य पर पलीता लग रहा है।
शासन स्तर से गांवों को सशक्त व हाईटेक बनाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर करवाया गया है। ग्रामीणों को जरूरी अभिलेखों के लिए ब्लॉक व तहसील का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति भी की गई है।
पंचायत सहायकों को पंचायत भवन में बैठकर कार्य पूरा करना है। दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग की दलील है कि वर्तमान में पंचायत सहायकों की ड्यूटी फार्मर रजिस्ट्री में लगी है। इसलिए पंचायत भवन बंद चल रहे हैं। पंचायत भवनों के बंद रहने के कारण ग्रामीणों को 5 से 18 किलोमीटर दूर ब्लॉक व तहसील जाना पड़ रहा है।