गाजीपुर। सूर्य देव के गुरु की राशि धनु में गोचर के साथ 16 दिसंबर से खरमास का आरंभ होगा। यह 14 जनवरी 2026 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ समाप्त होगा।
शेरपुर निवासी पंडित मुनींद्र नाथ उपाध्याय ने बताया कि खरमास के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, नए कारोबार की शुरुआत, यज्ञोपवीत धारण, वाहन, भूमि और आभूषण की खरीदारी जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। इस अवधि में ऐसे कार्य करने से सुख-सौभाग्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, साथ ही तनाव, रोग और विभिन्न प्रकार की कठिनाइयां बढ़ने की आशंका रहती है।
पंडित मुनींद्र नाथ उपाध्याय के अनुसार, खरमास के समय सूर्य देव की पूजा करना अत्यंत लाभकारी होता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, धन, लाल कपड़ा और चना का दान करने से वैभव में वृद्धि के योग बनते हैं। केसर का दान करने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
उन्होंने बताया कि बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने के लिए पीली वस्तुओं जैसे दाल, हल्दी, पीले वस्त्र और पीले फल आदि का दान करना भी विशेष फलदायी होता है। वहीं, खरमास के दौरान दुर्गा विधान, रुद्र पूजा और श्रीसत्यनारायण कथा जैसे धार्मिक अनुष्ठान वर्जित नहीं हैं। बताया कि इस अवधि में भगवती दुर्गा, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा एवं कथा का आयोजन श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।