नोटबंदी के बाद जन-धन खाते में एकमुश्त 27 लाख रुपये जमा किए जाने को गंभीरता से लेते हुए आयकर विभाग की टीम ने इसकी जांच शुरू कर दी है। टीम ने गुरुवार की शाम यूनियन बैंक की रौजा शाखा में जा कर मामले की पड़ताल की। इस संबंध में आयकर विभाग के सहायक आयुक्त -अनुसंधान सुमंत कुमार शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया जांच में यह प्रतीत हो रहा है कि यह पैसा अजय गुप्ता और उसके परिवार का नहीं है। देर रात आयकर अधिकारी अजय को लेकर वाराणसी चले गए।
नोटबंदी के बाद गोंसाईपुरा मुहल्ला निवासी और रौजा में यूनियन बैंक के पास सड़क किनारे चौकी पर मिठाई और समोसे की दूकान लगानेवाले अजय गुप्ता ने अपने जन-धन खाते में एकमुश्त 27 लाख रुपये जमा किए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आयकर विभाग ने पहले नोटिस जारी की थी। फिर टीम गुरुवार की शाम अचानक यूबीआई की रौजा शाखा में आ धमकी। टीम ने पहले शाखा प्रबंधक राजीव रंजन से खाते में जमा लाखों रुपये के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वे खाताधारक अजय गुप्त के घर गए।
अजय का घर पुरानी ईंटों से बना है। अधिकारी अजय कोे बैंक ले आए और पूछताछ की। अजय गुप्त के यह कहने पर कि यह रुपये उसकी मां देवंती देवी ने दिए थे। टीम के सदस्य अजय को बैंक में ही बैठाकर उसकी मां देवंती देवी से पूछताछ करने पहुंच गए। देवंती देवी ने बेटे को इतनी बड़ी रकम देने की बात से इनकार कर दिया। देर शाम तक अजय से बैंक में पूछताछ की जा रही थी। टीम में आयकर विभाग के सहायक आयुक्त के साथ अवधेश कुमार, मोतीचंद्र और गोपाल प्रसाद शामिल रहे। इस दौरान शहर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। बैंक के शाखा प्रबंधक राजीव रंजन ने बताया कि इतनी बड़ी रकम जमा नहीं की जा रही थी। लेकिन जब दूकानदार अजय गुप्ता पैनकार्ड लेकर आया तो उसका पूरा पैसा जमा करवा लिया गया। खातेदार के जमा रकम की राशि से उनका कोई लेना- देना नहीं है।