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UP : विवेचक ने 90 की जगह 92 दिन में दाखिल किया आरोप पत्र, हत्यारोपी को जमानत; पुलिस की बड़ी लापरवाही आई सामने

Thu, 28 Nov 2024 03:41 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

Ghazipur News : गाजीपुर का यह मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें पुलिस की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। आरोपी की पहली रिमांड 27 अगस्त को बनी थी। मुकदमे के विवेचक को 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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गाजीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दी जमानत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वप्न आनंद की अदालत ने आरपीएफ के दो जवानों के हत्यारोपी बिलेंद्र पासी को जमानत दे दी। अदालत ने एक लाख के निजी बंध-पत्र व एक लाख के दो जमानत बंध-पत्र दाखिल करने पर जमानत मंजूर की और उसे रिहा करने का आदेश दिया। इस मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पता चला कि विवेचक ने 90 की जगह 92वें दिन आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। इसका फायदा हत्यारोपी को मिला है।

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अभियोजन के अनुसार जमानिया कोतवाली देवाइथा गांव निवासी तबरेज खां ने तहरीर दी थी कि भाई जावेद खां आरपीएफ में तैनात थे। वह अपने साथी आरपीएफ सिपाही प्रमोद कुमार के साथ गुवाहाटी एक्सप्रेस से बिहार प्रांत के मोकामा जा रहे थे। 

अज्ञात लोगों ने रास्ते में चलती ट्रेन से दोनों को बाहर फेंक दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। वादी की सूचना पर अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान पुलिस ने बिलेंद्र पासी को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। आरोपी की पहली रिमांड 27 अगस्त को बनी थी। मुकदमे के विवेचक को 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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आरोप पत्र 92वें दिन दाखिल किया गया। इसका फायदा आरोपी को मिला है। आरोपी के अधिवक्ता ने 26 नवंबर को अदालत में जमानत याचिका दाखिल कर दी। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विवेचक ने निर्धारित समय सीमा के बाद आरोप पत्र दाखिल किया है। यह नियमावली का उल्लंघन है। अदालत ने पुलिस की घोर लापरवाही मानते हुए आरोपी बिलेंद्र पासी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली और उसे रिहा करने का आदेश दिया।

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