गीतांजलि श्री के गांव में जश्न मनाते परिजन
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उन्होंने बताया कि गीतांजलि के भाई ज्ञानेंद्र पांडेय ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन पर पूर्वांचल की भागीदारी पर किताब लिखी थी, जो काफी पठनीय है। वर्तमान में गीतांजलि श्री का परिवार दिल्ली में रहता है। गीतांजलि श्री ने हिंदी साहित्य में उपन्यास, कहानी और जीवनी तीनों विधाओं में रचनाएं लिखी हैं। उनके प्रकाशित उपन्यासों में माई, हमारा शहर उस बरस, तिरोहित, खाली जगह, कहानी संग्रह में वैराग्य, अनुगूंज, मार्च मां और साकुरा, यहां हाथी रहते थे, प्रतिनिधि कहानियां और जीवनी में बिट्वीन टू वर्ल्डस: एन इंटेलेक्चुअल बायोग्राफी ऑफ प्रेमचंद्र हैं।
साहित्य के क्षेत्र में उनको कामों के लिए इंदु शर्मा कथा सम्मान, संस्कृति मंत्रालय की सीनियर फेलोशिप, जापान फाउंडेशन की फेलोशिप, साहित्यकार सम्मान, स्काटलैंड और फ्रांस में राइटर्स रेजिडेंसी और द्विजदेव सम्मान मिल चुका है।