गहमर। अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, शिवयोग एवं एकादशी के शुभ संयोग में बुधवार को आदि शिल्पी भगवान विश्वकर्मा का पूजनोत्सव मनाया जाएगा। महंत आकाश राज तिवारी ने बताया कि चार योगों के संयोग से विश्वकर्मा पूजा का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन विशेष रूप से व्यवसायी, श्रमिक, वाहन चालक, इंजीनियर और टेक्नीशियन इस पर्व को श्रद्धा से मनाएं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।उन्होंने बताया कि ऐसा 10 दशक बाद हुआ है कि चतुर्ग्रही योग में साधक शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा व आराधना करेंगे। बताया कि आत्मा के कारक सूर्य देव 17 सितंबर की सुबह सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
कहा कि मान्यता है कि विशेष योग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। बताया कि अमृत सिद्धि योगः स्वास्थ्य, आयु और समृद्धि को बढ़ाने वाला माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला है। जबकि गुरु पुष्य योग ज्ञान, वैभव और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ होता है। इसके अलावा शिवयोग और एकादशी पाप नाशक और मनोकामना पूरी करने वाला विशेष योग है।