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मानव को अपने कर्म का फल भुगतना पड़ेगा: वेंकटेश प्रपन्नाचार्य महाराज

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देवकली। ब्रहमस्थल देवकली में आयोजित मानस सम्मेलन के प्रथम दिन शुक्रवार की शाम संगीतमय प्रवचन करते हुए गया बिहार के पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी युवराज रामानुजाचार्य वेंकटेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि कोरोना काल ने नौ माह में संपूर्ण विश्व को झकझोर दिया। प्राकृतिक आपदाएं क्यों आ रही हैं कहीं न कहीं मानवीय ऋटियां हैं। एक-दूसरे से दूर रहने को मजबूर कर दिया। परमपिता परमेश्वर की कृपा से जीव को देव दुर्लभ मानव शरीर मिला है जो देवताओं को भी दुर्लभ है। यह कर्मयोनी है, जैसा कर्म मानव करेगा उसका फल भी उसे भुगतना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि जीव भौतिक सुखों के उपभोग के साथ आध्यात्मिक उत्कर्ष प्राप्त कर आवागमन के बंधन से मुक्त हो सकता है जो इस शरीर का परम लक्ष्य है। जीवन में सुख, शांति के लिए भक्ति ही एक मात्र सर्वोत्तम साधन है। मानव अपना सुधरना नहीं चाहता है। दूसरों को सुधारना चाहता है। जीव परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। पति-पत्नी, धन-दौलत सभी कर्म के अनुसार मिलता है। जैसा कर्म करेंगे उसका फल इसी मानव जीवन में भुगतना पड़ेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभुनाथ पांडेय एवं संचालन अरविंदलाल श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच एवं इलाज शिविर में 35 रोगियों की जांच एवं इलाज बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डा. शैलेंद्र ने किया। इस अवसर पर नरेंद्र कुमार मौर्य, अर्जुन पांडेय, रामनरेश मौर्य, अवधेश मौर्य, त्रिलोकीनाथ गुप्ता, सतीश गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, पवन एवं विशाल वर्मा आदि मौजूद थे।
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