बच्चों के साथ ही बड़े और युवाओं पर होली की खुमारी सिर चढ़कर
बोलती रही है। हर कोई अपने आप में अलग दिखाने को लेकर जोश में था। बाजार
में विभिन्न प्रकार के मुखौटों के साथ ही टोपी की दूकानें सजाई गई थी। अन्य
टोपियों के अलावा युवाओं ने बाल से निर्मित टोपियों की जमकर खरीदारी की।
टोपी खरीदने के बाद उसे लगाकर युवक शहर में घूमते रहे। आलम यह था कि पैदल
यो फिर बाइक सवार, सभी के सिर पर विभिन्न प्रकार की टोपियां नजर आ रही थी।
टोपियों की जबरदस्त मांग होने से इसकी बिक्री करने वाले दूकानदारों की
बल्ले-बल्ले रही। उन्होंने औने-पौने दामों पर इन टोपियों की बिक्री की।