गाजीपुर जिले के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कंडम बेडों पर उपचार कराने को मरीज विवश हैं। यही नहीं अक्रियाशील उपकरणों के परीक्षण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। स्थिति तो यह है एक वर्ष में एक कमेटी गठित कर किसी तरह से कोरमपूर्ति कर इतिश्री कर ली जाती है। विभाग के उच्चाधिकारियों की इस लापरवाही से मरीज बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर उपचार की सुविधा प्रदान करने के लिए 16 सीएचसी एवं पीएचसी स्थापित तो कराया गया, लेकिन स्थिति यह है कि यहां के बेड सिर्फ वार्ड में रखे मात्र हैं। चिकित्सा से संबंधित उपकरण की स्थिति भी काफी खराब है। खराब पड़े बेड और अक्रियाशील उपकरणों की स्थिति इन केंद्रों पर लंबे समय खराब है।
बावजूद इसको बदलने एवं परीक्षण कर कंडम घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर महकमे के अधिकारी लापरवाह बने हुए है। इस संबंध में सीएमओ डा. जीसी मौर्या ने बताया कि कमेटी गठित कर जल्द ही कंडम उपकरणों की सूची तैयार कराई जाएगी। साथ ही नए उपकरण एवं बेड स्थापित कराए जाएंगे।