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Ghazipur News: एमआरआई में घुटने की फिल्म, हाथ में थमा दी ब्रेन की रिपोर्ट

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एमआरआई के लिए की गई बिलिंग। स्रोत- पीड़ित
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घुटने का इलाज कराने पहुंचे, हाथ में थमा दी ब्रेन की एमआरआई रिपोर्ट
- 3500 रुपये खर्च कर कराई थी एमआरआई, 200 रुपये फीस देकर डॉक्टर को दिखाया तो खुली रिपोर्ट की गड़बड़ी, इलाज भी अटका
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। घुटने की गिल्टी का इलाज कराने की उम्मीद लेकर मेडिकल कॉलेज के 300 बेड अस्पताल पहुंचे मरीज को एमआरआई की ऐसी रिपोर्ट थमा दी गई, जिसने उसे हैरान कर दिया। घुटने की जांच के लिए 3500 रुपये खर्च कर एमआरआई कराने वाले मनिहारी द्वितीय के भाजपा मंडल महामंत्री राजू मिश्रा को फिल्म तो घुटने की मिली, लेकिन रिपोर्ट ब्रेन की दे दी गई।
पहेतिया उर्फ सरौली निवासी राजू मिश्रा ने बताया कि 29 सितंबर को घुटने में परेशानी पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. केके यादव को दिखाया था। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने 29 सितंबर को निर्धारित शुल्क 3500 रुपये जमा कर एमआरआई कराई। जांच के बाद फिल्म मिल गई, लेकिन रिपोर्ट अगले दिन यानी 30 सितंबर को देने की बात कही गई।
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बुधवार को दिन में रिपोर्ट मिलने के बाद वह सैनिक चौराहा स्थित डॉ. केके यादव के निजी क्लीनिक पहुंचे। डॉक्टर को दिखाने के लिए 200 रुपये फीस जमा की। डॉक्टर ने एमआरआई की फिल्म और रिपोर्ट देखी तो पता चला कि फिल्म घुटने की है, जबकि रिपोर्ट ब्रेन की बनी हुई है। इसके बाद डॉक्टर ने दोबारा एमआरआई कराने और सही रिपोर्ट लेकर आने के बाद ही इलाज शुरू करने की बात कही। राजू मिश्रा का कहना है कि बीमारी के इलाज के लिए पहले ही काफी खर्च हो चुका है। गलत रिपोर्ट के कारण इलाज शुरू नहीं हो सका। अब दोबारा जांच कराने की परेशानी अलग है। उनका कहना है कि एमआरआई के लिए जमा की गई रकम और निजी अस्पताल में दी गई फीस के बाद भी बीमारी का इलाज शुरू नहीं हो पाया।
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एक नाम के दो मरीज होने से तकनीकी दिक्कत की आशंका
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि एमआरआई की रिपोर्ट ऑनलाइन आती है और अस्पताल में दो टेक्नीशियन तैनात हैं। राजू मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई है कि फिल्म घुटने की मिली, जबकि रिपोर्ट ब्रेन की है। उन्हें दोबारा एमआरआई जांच के लिए एक अक्तूबर को बुलाया गया है। ऑनलाइन रिपोर्ट के दौरान एक नाम के दो मरीज होने से तकनीकी दिक्कत की आशंका है। मामले की पूरी जांच कराई जाएगी और शासन द्वारा नामित एमआरआई संस्था के जिम्मेदारों से शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
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