जिलेभर में गोवर्धन का पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने परिवार के साथ पूजा-अर्चना की और खुशी-खुशी त्योहार मनाया। जगह-जगह गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाए गए। महिलाओं ने घर में गोबर से गोवर्धन महाराज की प्रतिमा बनाई। कुछ जगह सार्वजनिक स्थान पर भी गोवर्धन की पूजा की गई। महिलाओं और बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। पूजा के बाद एक-दूसरे को प्रसाद बांटकर एवं पटाखे छोड़कर खुशियां मनाई गई। लोगों ने बताया कि यह पर्व सदियों से मनाया जा
रहा है।
शहर के विभिन्न मुहल्लों में भी गोबर से गोधन बनाए गए थे, जहां निर्धारित समय पर गोधन कूटने वाली महिलाओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सभी महिलाएं थाली में रुई की माला, चना, लाई, धतुरा, घडिय़ा, मिठाई, भचकट्या आदि पूजा संबंधित सामान लेकर पूजा स्थल पर पहुंची। इसके बाद पूजन-अर्चन का कार्यक्रम शुरू हुआ। इस दौरान पूजा में शामिल महिलाओं द्वारा अन्य को गोधन की कहानी सुनाई गई। इसके साथ ही गोवर्धन के गीत भी महिलाओं द्वारा गाया गया। पूजा की रश्म पूरी होने के बाद महिलाओं ने मूसल से गोधन की कुटाई की।
मालूम हो कि गोधन में चढ़ाई गई मिठाई पूजा करने के बाद महिलाएं दूसरे दिन अपने भाई को खिलाती हैं। इसके बदले में भाई द्वारा बहनों को उपहार दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस मिठाई को सिर्फ लड़के ही खा सकते है, लड़कियां नहीं। भैयादूज पर बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर उनका मुंह मिठा कराया तथा उनके दीर्घायु होने की कामना की। दुल्लहपुर, मरदह, बिरनो, जंगीपुर, कासिमाबाद, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, दुबिहा, ताजपुर डेहमा, नोनहरा, गहमर, बारा, भदौरा, दिलदारनगर, जमानिया, मतसा, सुहवल, करंडा, खानपुर, सैदपुर, औड़िहार, सादात, भीमापार, बहरियाबाद, शादियाबाद, देवकली, नंदगंज, जखनिया आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी भैयादूज और गोवर्धन का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया।