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असमानता को बढ़ावा देता है वैश्वीकरण

Mon, 29 Feb 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गाजीपुर
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स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में भारत में संस्कृति परिवर्तन और अस्तित्व एवं वैश्वीकरण विषय पर चल रहा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को हो गया। बतौर मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. जयकांत तिवारी ने कहा कि वैश्वीकरण विभेदक है, विनाशक है और असमानता को बढ़ावा देता है। इसकी सार्थकता एवं प्रगतिशीलता, बहुलीकरण एवं सामूहिकता में ही प्रमाणित होगी।
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कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. एपी सिंह ने कहा कि विश्व के साथ भारत भी आगे बढ़ रहा है लेकिन भाईचारा की कमी समाज का महत्वपूर्ण प्रश्न है। विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के  प्रो. डा. आरएन त्रिपाठी ने कहा कि समय के साथ उपभोक्ता की संतुष्टि एवं संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है। भारतीय संस्कृति का परिचायक कुटुंबीकरण योग है तो वैश्वीकरण मांग है।

 आर्य कन्या पीजी कालेज के प्रो. मनीष तिवारी ने डिजिटाइजेशन को उपलब्धि बताया लेकिन इसे ही मनुष्य के एकाकीपन को बढ़ाने का कारक भी बताया। प्रो. अजय राय ने किन्नरों की दशा एवं समलैंगिकता पर प्रकाश डाला। डा. अभय कुमार मालवीय ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में विकासशील देशों की पारंपरिक जीवनशैली की ओर ध्यान देने की जरूरत है।
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आयोजक सचिव प्रो. अवधेश नारायण राय ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर विस्तार से प्रकाश डाला। संगोष्ठी में विचार व्यक्त करने वालों में डा. कृष्णानंद चतुर्वेदी, डा. नरनारायण राय, डा. देवप्रकाश राय, डा. आरएन तिवारी, प्रो. ज्ञान सिंह, डा. अवधेश कुमार पांडेय, डा. सतीश कुमार पांडेय, डा. विजय कुमार ओझा, डा. सतीश कुमार राय, डा. रवि राय, डा. सुजीत, डा. नित्यानंद राय, डा. राघवेन्द्र पांडेय, डा. अशोक राय, डा.रविन्द्रनाथ राय, रामानुज राय उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डा. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव अनंद एवं उपसंहार कार्यक्रम सचिव डा. विलोक सिंह एवं आभार राजनीतिशास्त्र के विभागाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश सिंह ने व्यक्त किया।  
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