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नौ साल में मात्र 73 बालिकाएं हुई लाभांवित

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गाजीपुर। पंजीकृत श्रमिकों के लिए 2011 से चल रही बालिका मदद योजना के तहत अबतक कुल 73 बालिकाएं लाभान्वित हुईं हैं। इस योजना के तहत श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों की प्रथम या दूसरी संतान बेटी होने पर सरकार एकमुश्त 25 हजार रुपये देती है। जबकि जन्म से विकलांग बेटी को पचास हजार रुपये दिए जाते हैं। इसका लाभ बेटियों के 18 साल की उम्र पूरा करने पर मिलता है लेकिन उस समय तक बेटी अविवाहित होनी चाहिए।
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प्रदेश सरकार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को खुशहाल बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। श्रमिक परिवार का बोझ कम करने के उद्देश्य से ‘बालिका मदद योजना’ चलाई जा रही है। जिले में इस योजना का लाभ पाने वालों की संख्या कम है। इसके पीछे कारण जागरूकता की कमी का होना बताया जा रहा है। योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की प्रथम या दूसरी संतान पुत्री होने पर 18 वर्ष के लिए सरकार की ओर से एकमुश्त 25 हजार रुपये जमा होते हैं जबकि जन्म से विकलांग बालिकाओं के लिए 50 हजार रुपये जमा किए जाते हैं। निर्धारित समय अवधि पूर्ण होने के बाद धनराशि पुत्री को एक बार में दी जाती है। जबकि पुत्री की 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पूर्व संबंधित पुत्री का निधन हो जाता है तो ऐसी स्थिति में योजना का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में पूरी सावधि जमा धनराशि कोष में वापस हो जाएगी। इसी तरह अविवाहित रहने पर ही धनराशि का भुगतान किया जाता है। जिले में कुल 70,000 निर्माण श्रमिक श्रम विभाग में पंजीकृत हैं लेकिन 2011 में योजना लागू होने से अबतक महज 73 निर्माण श्रमिकों की बेटियों को ही इसका लाभ मिल सका है।
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पंजीकरण के एक साल बाद ही मिलेगा लाभ
गाजीपुर। महिला एवं पुरुष कामगार जो पंजीकृत हैं, उनकी बेटी को बालिका मदद योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन इसके लिए निर्माण श्रमिकों का एक वर्ष पहले पंजीकरण होना चाहिए। साथ ही उसके द्वारा अंशदान भी जमा किया गया हो, तभी उसकी प्रथम या दूसरी संतान पुत्री होने पर सरकार की इस योजना का लाभ दिया मिलेगा।
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दो से अधिक पुत्रियों पर नहीं मिलेगा लाभ
गाजीपुर। पंजीकृत निर्माण श्रमिक के परिवार में जन्मी पहली और दूसरी बालिका को इस योजना लाभ मिलेगा। तीसरी पुत्री को इस योजना लाभ शासन की ओर से नहीं मिलेगा। यही नहीं अगर पंजीकृत निर्माण श्रमिक के परिवार में अपनी संतान न होने की स्थिति में बालिका को कानूनी रूप से गोद लेने पर बालिका मदद योजना का लाभ मिलेगा। जबकि बालिका के जन्म का पंजीकरण जन्म-मृत्यु पंजिका पर होना अनिवार्य है।
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इनसेट...
एक साल के अंदर जन्म प्रमाण पत्र जमा कराना जरूरी
गाजीपुर। पंजीकृत लाभार्थी श्रमिक की ओर से फार्म भर कर उसे अभिलेखों के साथ श्रम कार्यालय, संबंधित तहसील के तहसीलदार या खंड विकास कार्यालय में जमा किया जा सकता है। आवेदन पत्र जमा करने के एक वर्ष के भीतर बालिका के जन्म प्रमाण-पत्र की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करना अनिवार्य है। एक वर्ष से अधिक अवधि बीतने पर अगर जन्म प्रमाणपत्र जमा किया गया तो फार्म अस्वीकृत कर दिया जाएगा।
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आवेदन पत्र के साथी ये करें संलग्न
पंजीकृत निर्माण श्रमिक का पहचान प्रमाण-पत्र, संबंधित बालिका के जन्म प्रमाण पत्र की फोटो प्रति, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से दिया गया आंगनबाड़ी केंद्र का प्रमाण पत्र, पुत्री अगर गोद ली गई है तो उससे संबंधित यथा प्रमाणित अभिलेख, निर्माण श्रमिक के परिवार रजिस्टर, राशन कार्ड या अन्य कोई अभिलेख जिसमें निर्माण श्रमिक के परिवार का विवरण हो, इसकी फोटो प्रति संलग्न करनी होगी।
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