चीतनाथ चौराहे पर स्थापित भगवान गणेश प्रतिमा की पूजा अर्चन करते श्रद्धालु।
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शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को गणेश पूजनोत्सव की धूम शुरू हो गई। शहर के किसी पंडाल में रविवार की रात तो किसी में सोमवार की सुबह गणपति की प्रतिमा पांडाल में स्थापित की गई। देर शाम विधिवत मंत्रोचार के बाद ब्राह्मणों ने गजराज की आंखों पर बंधी पट्टी को खोल दिया।
इसके बाद गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के बीच भगवान गणेश की पूजा-अर्चना शुरु हो गई। देर रात तक पंडालों में गणपति के दर्शन-पूजन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। किसी पूजा समिति द्वारा तीन से चार दिन तो किसी पूजा समिति द्वारा एक सप्ताह तक गणेश की आराधना का कार्यक्रम तय किया गया है। पूजन के दौरान पांडालों में गणपति बप्पा मोरया का जयघोष किए जाने से आसपास का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय बना रहा।
जिले में दुर्गा पूजा की तरह अब धीरे-धीरे खासकर शहर में गणेश पूजा की भी धूम शुरु हो गई है। शहर में सबसे पहले चीतनाथ मुहल्ला में वर्षों पहले गणेश पूजा की शुरुआत की गई, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई। इस वर्ष शहर के मिश्रबाजार, महाजनटोली, स्टीमरघाट, गोराबाजार, चीतनाथ, नवाबगंज, झंडातर आदि मुहल्लों में पर्व से एक दिन पूर्व भव्य पांडाल के निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया। पूजा समिति के सदस्यों द्वारा रविवार की रात और सोमवार की सुबह ठेला और विभिन्न वाहनों से मूर्तिकारों के यहां से प्रतिमा लाकर पांडाल में स्थापित कर दिया गया।
देर शाम ब्राह्मणों द्वारा विधिवत हवन-पूजन के बीच भगवान गणेश की प्रतिमा पर बंधी पट्टी को खेल दिया गया। इसके बाद पांडालों में गणेश के आस्था की बयार बहनी शुरु हो गई। रात में गजराज के दर्शन-पूजन के लिए पांडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पांडालों में साउंडों पर बज रहे भक्ति गीत से आसपास का माहौल पूरी तरह से गणेशमय बन रहा है। पांडालों में सजी रंग-बिरंगी झालरें छंटा बिखेर रही थी।
किसी पूजा समिति की तरफ से दो से तीन दिन और किसी पूजा समिति की तरफ से एक सप्ताह तक पूजा का कार्यक्रम बनाया गया है। भगवान गणेश की आराधना से लहुरी काशी में लगातार कई दिनों तक गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से
गुंजायमान रहेगी।