भीमापार। इन दिनों मोक्षदायिनी गंगा के जलस्तर में बढ़ने का क्रम जारी है। हालत यह है कि औड़िहार स्थित भगवान वराह धाम स्थित आदित्य घाट की 13 सीढियां मोक्षदायिनी गंगा के बढ़ते जलस्तर में समा चुकी हैं। वराह धाम के पुजारी हरिओम बाबा और सेवक बच्चेलाल ने बताया कि गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। वहीं जौहरगंज स्थित मापदण्ड के अनुसार गंगाजी का पानी एक सेन्टीमीटर प्रति घण्टे की तेजी से बढ़ रहा है। इस हिसाब से अभी खतरा अपने चेतावनी बिन्दु से लगभग तीन सेन्टीमीटर नीचे है।
गंगा नदी किनारों पर रहने वाले खरौना, पटना, शादी भादी, कुसहीं, हथौड़ी आदि गांव के ग्रामवासियों का कहना है कि देखने में अभी गंगा का पानी भले ही दूर दिखता हो। परन्तु बीते 24 घण्टों में उनके पानी ने अपने किनारे की तीन फुट से अधिक जमीन को अपने आगोश में ले लिया है। दूसरी ओर गांगी नदी का जलस्तर भी रूकने का नाम नहीं ले रहा है। यहीं कारण है कि ऊचौरी, भूंवरपुर, भीमापार, दौलतपुर, सोनियापार, कूढ़ालम्बी, नायकडीह, मौधा, मकरसन, नसीरपुर, सोनरान आदि गांवों के लोगों की नींद उड़ी हुई है। तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों की धड़कनें अब तेज होने लगी हैं। उधर, गोमती नदी के तटवर्ती गांव तेतारपुर, भुजाड़ी, गौरी और गोरखा गांव के पप्पू यादव, लालजी यादव, भोला सिंह, धीरज सिंह, पन्ना राम, संजय शुक्ल, देवी चौधरी, रामसिंह, अरविन्द कुमार, अशोक यादव आदि का कहना है कि बारिश के चलते इलाकाई नदियों में पानी बढ़ने के बाद इस बार गोमती में भी बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में ग्रामवासियों को बहुत सचेत रहने की जरूरत है। लोगों ने बताया कि इस हिसाब से देखा जाय तो खतरा सिर पर म।ंडरा रहा है।
कान में तेल डाल सो रहे हैं माननीय-
भीमापार। इलाके के लोगों ने बताया कि तेजी के साथ बढ़ रहे गंगा नदी के जलस्तर पर सतर्कता और सुरक्षा पर कोई तैयारी नहीं है। शासन और प्रशासन के लोग कान में तेल डाले पड़े हैं। जानकारी के बाद भी स्थानीय जन-प्रतिनिधि बाढ़ का कोई स्थायी समाधान नहीं ढूढ़ पा रहे हैं। कहा कि इन्ही महीनों में नदियों में कईं बन्धों का पानी भी भारी मात्रा में छोड़ा जाता है। इसलिये इस मौके पर किनारे पर रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही फसल आदि सम्पत्ति का नुक्सान भी कम से कम हो, इस पर गम्भीरता से विचार किया जाता है। लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। जबकि पिछले साल जून में ही बाढ़ से निपटने की सारी तैयारियां कर ली गई थीं।