गाजीपुर। दो दिन के बढ़ाव के बाद सोमवार की देर शाम गंगा स्थिर हो गई। सुबह से ही बढ़ाव की गति लगातार धीमी पड़ती गई। उधर गोमती में भी मामूली तेजी दिखाई दे रही है। वह करीब चार घंटे पर एक सेमी बढ़ रही है। जिले की अन्य सहायक नदियों में भी उतार ही दिखाई दे रहा है। मगई का पानी भी कम हो रहा है। कुछ इलाकों में खेतों में लगा पानी निकल गया है। इससे किसान राहत की सांस ले रहे हैं।
सोमवार की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर के 55.290 मीटर पहुंचने के बाद गति काफी धीमी हो गई। दोपहर तक एक सेमी प्रति घंटा बढ़ाव था। करीब चार बजे जलस्तर के 55.310 मीटर पहुंचने के बाद यह गति और धीमी हो गई। शाम आठ बजे से गंगा स्थिर हो गई। जिले में गंगा नदी का खतरा बिंदु 63.105 मीटर पर है। इसी प्रकार गोमती नदी में भी करीब एक सप्ताह से हल्का बढ़ाव हो रहा है। सोमवार को नदी का जलस्तर 54.560 मीटर पर पहुंच गया था। जिले में गंगा, गोमती के अलावा टौंस, कर्मनाशा, बेसो, मगई, गांगी, भैंसही, उदंती आदि नदियां बहती हैं। जिले के सबसे बड़े भू-भाग में गंगा बहती है। इसमें बाढ़ आने से करीब सात सौ गांव प्रभावित होते हैं।
मुहम्मदाबाद के सेमरा, बच्छलका पुरा, सुल्तानपुर, गौसपुर आदि तटवर्ती गांवों के लोग गंगा के पानी के बढ़ाव को महसूस करते हुए सतर्क हो गए हैं। गंगा के किनारे बोल्डर और पत्थर लगाकर ठोकर बनाया गया है लेकिन यह बाढ़ की आपदा को रोकने के लिए नाकाफी ही लग रहा है। औड़िहार संवाददाता के अनुसार गंगा और गोमती में बढ़ाव के बाद तटवर्ती लोग सहम गए हैं। उधर मगई समेत अन्य नदियों के तेवर भी ढीले पड़ गए हैं। दुबिहा संवाददाता के अनुसार गांवों के सिवान में लगा मगई नदी का पानी निकल रहा है जिससे काफी राहत है। हालांकि कुछ जगह अभी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।