महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अब गुर्दा रोग से पीड़ित मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। चार फरवरी से मेडिकल कॉलेज अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में पांच और नई मशीनें चालू की जाएंगी।
इससे मशीनों की संख्या 15 हो जाएगी। इससे अब 45 मरीजों की डायलिसिस रोजाना आसानी से हो सकेगी। हालांकि इसके बाद भी 10 और मशीनें बढ़ाने की तैयारी है। इसके बाद कुल मशीनों की संख्या बढ़कर 25 हो जाएगी।
हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह के अलावा इन्फेक्शन का उचित उपचार न मिलने से मरीज गुर्दा रोग की चपेट में आ रहे हैं। किडनी से पीड़ित मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें गैर प्रांतों एवं जनपदों तक दौड़ लगानी पड़ती है। वजह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थापित डायलिसिस यूनिट में मरीजों की संख्या पहले ही अधिक है।
12 मरीज यूनिट के वेटिंग लिस्ट में शामिल हैं। प्रतीक्षा सूची में शामिल और अन्य किडनी के मरीजों को डायलिसिस के लिए 2200 से 2500 रुपये तक एक बार में सिर्फ डायलिसिस के लिए प्राइवेट संस्थानों में खर्च करना पड़ता है। दवा और आवागमन का खर्च अलग से।
गुर्दा मरीजों की परेशानी को देखते हुए पांच नई मशीनों को स्थापित कराते हुए बेड बढ़ा दिया गया है, जिसे चार फरवरी से चालू किया जाएगा। अब मशीनों की संख्या 10 से बढ़कर 15 और बेडों की संख्या 15-15 हो जाएंगी। वर्तमान समय में 10 मशीनों पर प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। नई मशीन से यह संख्या 45 हो जाएगी।