गाजीपुर। लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर चालू वित्तीय वर्ष में जनपद की करीब 180 सड़कों की मरम्मत की स्वीकृति मिली है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी 250 से अधिक सड़कें बदहाल हैं। इनमें कई ऐसी सड़कें भी शामिल हैं, जिनकी सात वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है। इन सड़कों पर ग्रामीणों को गड्ढों के बीच सफर करना पड़ रहा है।
वर्तमान आधुनिक युग में भी जनपद के ग्रामीण अंचलों की बड़ी आबादी बेहतर सड़कों जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रही है। जर्जर सड़कों के कारण लोगों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन सड़कों की बदहाली के चलते हादसे भी होते रहते हैं। साथ ही समय की बर्बादी होती है और वाहनों में तकनीकी खामियां भी आती हैं।
ग्रामीण इलाकों में करीब 38 लाख की आबादी निवास करती है। इतनी बड़ी जनसंख्या आज भी अच्छी सड़कों के लिए तरस रही है। लिंक मार्गों से लेकर गांवों के अधिकांश मुख्य मार्ग बदतर स्थिति में हैं। कहीं उखड़ी गिट्टियां राहगीरों के पैरों में चुभ रही हैं, तो कहीं जानलेवा गड्ढे हर पल खतरा बने हुए हैं। प्रदेश सरकार की मंशा है कि लोगों को आवागमन में सुविधा मिले, इसके लिए सड़कों को बेहतर बनाया जाए। लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण लोगों को इसका लाभ मिलता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है।
मरदह ब्लॉक क्षेत्र का सुलेमापुर-देवकली मार्ग करीब तीन किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग से मड़ही, खजूरगांव, कलवरा, जगदीशपुर अवतार, अविसहन आदि गांवों के पांच हजार से अधिक लोग आवागमन करते हैं। लोक निर्माण विभाग की उदासीनता के कारण सात वर्षों से इस मार्ग पर धूल उड़ रही है। सड़क की पिच पूरी तरह उखड़ चुकी है और गिट्टियां दिखाई दे रही हैं।
युवराजपुर-सुहवल मार्ग का कायाकल्प ढाई वर्षों में नहीं हो सका है। यह मार्ग करीब तीन किलोमीटर लंबा है। जगह-जगह बने गड्ढों के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। रात के समय इस मार्ग पर सफर करना और भी खतरनाक हो जाता है। इस मार्ग से पटकनी, युवराजपुर, बवाड़े, भिक्खी चौरा, हरिश्चंद्रपुर आदि गांवों के करीब दो हजार लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं।
चालू वित्तीय वर्ष में कई सड़कों की मरम्मत के प्रस्ताव को शासन से स्वीकृति मिली है। शेष प्रस्ताव नए वित्तीय वर्ष में शासन को भेजा जाएगा। - बीएल गौतम, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी