गाजीपुर। जल निगम विभाग (ग्रामीण) अपनी नकारात्मक कार्यशैली से सुर्खियों में है। ताजा मामला जल निगम (ग्रामीण) के अधिशासी अभियंता मो. हाशिम कासमी का निलंबन है। शासन की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई के दो मुख्य आधार बताए गए हैं, एक, आईजीआरएस निस्तारण में लापरवाही और दूसरा, पेयजल आपूर्ति के लिए गांवों में मार्गों की खुदाई कराकर उनकी मरम्मत न कराना।
जनपद में 2021 से जल निगम (ग्रामीण) की 763 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी कुल लागत 2756 करोड़ रुपये है। एक ओर विभाग निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति 50 प्रतिशत से अधिक होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर गांवों में सूखे नलों की टोंटियां और अधूरे कनेक्शन इस दावे की पोल खोल रहे हैं। पिछले चार वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी दुश्वारियां झेल रही है।
विभाग पर मनमाने ढंग से कार्य करने के आरोप लगते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों और गलियों की खुदाई कर दी जाती है, लेकिन बाद में मरम्मत नहीं कराई जाती। इससे आवागमन में भारी दिक्कतें हो रही हैं। इस संबंध में लोगों ने कई बार विभाग से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
इसी क्रम में नमामि गंगे के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव द्वारा प्रदेश के 12 इंजीनियरों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया, जिसमें गाजीपुर के अधिशासी अभियंता मो. हाशिम कासमी का नाम भी शामिल है। लोगों का कहना है कि निलंबित अधिशासी अभियंता का सीयूजी मोबाइल नंबर अक्सर बंद रहता था। यदि फोन चालू भी रहता था, तो वह कॉल रिसीव नहीं करते थे। कार्रवाई के बाद से जल निगम (ग्रामीण) विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, नए अधिशासी अभियंता के रूप में सुनील की तैनाती की गई है, जो देवरिया जनपद के निवासी हैं।