गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं प्रेमचंद साहित्य संस्थान की ओर से राष्ट्रीय कार्यशाला प्रेमचंद को कैसे पढ़ें आयोजित की गई है। इसमें प्रेमचंद और किसान जीवन विषय पर प्रमुख वक्ता प्रोफेसर राजेश मल्ल ने कहा कि देश की 67 फ़ीसदी आबादी जिस पर अवलंबित हो और बाकी 33 फ़ीसदी जो लोग बचते हैं वह लोग भी सोना, डॉलर या रुपया नहीं खाते खाना उनको रोटी ही है। इसलिए किसान जीवन के उत्पादन पर ही उनका जीवन निर्भर है। इस लिए किसान जीवन का अर्थ मेरे लिए भारतीय जीवन है।
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में नामवर जी ने राष्ट्रीय रूपक का सवाल उठाया था और कहा था प्रेमचंद का जो उपन्यास है वह राष्ट्रीय रूपक है जिस पर काफी विवाद हुआ था। इस पर बाद के दिनों में साखी में नामवर जी का एक लेख अंग्रेजी ढंग का नावेल और हिंदी उपन्यास प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने कंटेंट पर तो कम जोर दिया था लेकिन फार्म के तौर पर उपन्यास को लेकर उन्होंने प्रेमचंद को सर्वश्रेष्ठ कहा। इस प्रकार ध्यान में रखा जाए कि औद्योगिकरण के दौर में भी किसान एक बहुत महत्वपूर्ण तत्व रहा। भारत की और दुनिया की दृष्टि में भी। उन्होंने कहा कि अधिक लागत कम उत्पादन किसानों की जीवन की समस्या है। प्रेमचंद ने अपने लेखन में इस बात को बहुत गंभीरता से रेखांकित किया है कि कम उत्पादन और अधिक लगान के साथ कर्ज ही किसान जीवन की असल समस्या है। कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने किसानों की स्थिति, वर्तमान समय में नारियों की स्थिति और किसानों के प्रति सरकार की ओर से उठाए गए कदम आदि बिंदुओं पर प्रश्न उठाए। प्रो. मल्ल द्वारा तर्कसंगत उत्तर पाकर संतुष्ट हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निरंजन कुमार यादव ने तथा धन्यवाद डॉ. धर्मेंद्र प्रताप ने दिया।