गाजीपुर। राज्य के होम्योपैथिक कॉलेजों में संविदा शिक्षकों/चिकित्सकों एवं दूसरे कर्मचारियों को अनियमितता के आरोप में निकाले जाने तथा जांच में निर्दोष साबित होने के बाद भी तैनाती न देने से नाराज हैं। इसे लेकर चिकित्सक और दूसरे कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों और चिकित्सकों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक संविदा शिक्षक टीचर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष डा. नरेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि अफसरों के इस मनमानी को लेकर संगठन संघर्ष करेगा। कहा कि स्वास्थ्य विभाग में अफसरों की लापरवाही और अनदेखी की वजह से दर्जनों कर्मचारी भर्ती के बाद भी निकाल दिए गए हैं। वे आज अपने अस्तित्व से संघर्ष कर रहे हैं।
डा. नरेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि प्रदेश के नौ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में तैनात 192 संविदा शिक्षकों सहित करीब 350 अन्य संविदा कर्मी हटाए गए। संविदा शिक्षकों को हटाए जाने से छात्रों का भविष्य भी अंधकार में है। उन्होंने कहा कि नौ होम्योपैथिक कालेजों में नौ प्राचार्य एवं 388 शिक्षकों के पद स्वीकृत है। लेकिन केवल तीन प्राचार्य एवं 70 शिक्षक ही सेवारत हैं। शिक्षकों की कमी की वजह से वर्ष 2017 में प्रदेश के तीन होम्योपैथिक मेडिकल कॉॉजों में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। किंतु सरकार ने वर्ष 2018 में संविदा पर शिक्षकों की तैनाती की। परिणाम स्वरूप न केवत तीनों कॉलेजों में कानपुर, गाजीपुर, मुरादाबाद में प्रवेश की अनुमति मिली, बल्कि दो नये कॉलेज भी गोरखुपर एवं अलमगढ़ आरंभ किया गया। लखनऊ, प्रयागराज के कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम आरंभ हुआ। संविदा पर चयनित सभी शिक्षक एमडी धारक थे। कितं दुर्भाग्य है कि नियमति 70 शिक्षकों में आधे कसे अधिक एमडी न होने के बावजूद भी एमडी के विद्यार्थी पढ़ा रहे हैं।
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