गाजीपुर। कहा जाता है कि देश भक्ति की कोई जाति-धर्म नहीं होती है। सभी भारत मां के बेटे है। कुछ ऐसा ही नजारा दिखा शहीद अश्वनी कुमार यादव की शव यात्रा और अंतिम संस्कार के दौरान। इस जाबाज को अंतिम विदाई देने वालों में हर जाति और धर्म के लोग शामिल थे। फक्र के बीच सभी की आंखे देश के इस वीर जवान के अंतिम विदाई के दौरान नम थी।
सैकड़ों लोगों के जनसमूह में निकली शव यात्रा में हर जाति और धर्म के लोग शामिल थे। सभी देश के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी देने वाले जिले के इस लाल की शहादत पर इतरा रहे थे। यात्रा में जहां सैकड़ों लोग शामिल थे, वहीं तमाम लोग श्मशान घाट पर शव आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही शव यात्रा श्मशान घाट पर पहुंची, हर कोई शहीद जवान के अंतिम दर्शन के लिए ब्याकुल हो उठा। शहीद की एक झलक पाने की होड़ मच गई। शहीद का चेहरा देख अधिकांश लोगों की आंखे फक्र के बीच सजल हो गई। मौजूद हजारों लोगों की नजर शहीद से ताबूत पर टिकी रही। लोग अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर नरजे गड़ाए रहे। चिता में आग लगने के बाद लोगों की नजरें हटी। आग लगने के बाद तमाम लोग जहां घाट से लौट गए, वहीं सैकड़ों लोग चीता शांत होने तक मौजूद रहे।
सलामी के समय शांत हो गया श्मशान
गाजीपुर। शहीद अश्वनी कुमार यादव की शव यात्रा, भारत माता जय, हिंदुस्तान जिंदाबाद, जब तक सूरज-चांद रहे अश्वनी तेरा नाम रहे, अश्वनी यादव अमर रहे आदि गगनभेदी नारों के बीच श्यामघाट पर पहुंचा। जैसे ही सीआरपीएफ के जवानों द्वारा सलामी देने का कार्य प्रारंभ किया गया, श्मशान पूरी तरह से शांत हो गया। मौजूद हजारों लोगों की निगाहे सलामी देने वाले सेना के जवानों पर टिक गई। सलामी की प्रक्रियां पूरी होने तक लोग पूरी तरह से शांत रहे।