विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक नगर के लाल दरवाजा स्थित पावर हाउस में शनिवार को हुई। इस मौके पर संचालन करते हुए समिति के जिला संयोजक निर्भय नारायण सिंह ने पिछली सपा सरकार में पांच वर्ष अनवरत संघर्ष के बाद भी सरकार ने बिजली कर्मचारियों को आश्वासन एवं उत्पीड़न के अलावा कुछ भी नहीं दिया। सातवां वेतन लागू करने के सवाल पर वेतन विसंगति के लिए समिति के झुनझुना थमा दिया।
आज मेहनतकशों के प्रति किए गए अन्याय के कारण ही यह सरकार प्रदेश की राजनीति से पूरी तरह से बाहर हो चुकी है और नई सरकार नए तेवर के साथ सत्तारूढ़ है। कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए 29 जून को मंडल कार्यालय पर उपस्थित होकर प्रदर्शन को सफल बनाएं।
उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश ने अपने कर्मचारियों-अधिकारियों का एक जनवरी 2016 से सातवां वेतन पुनरीक्षण वर्ष 2016 में ही कर दिया था, लेकिन अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के विभिन्न कर्मचारी-अधिकारी संगठनों-श्रम संघों के निरंतर अनुरोध के बावजूद ऊर्जा निगमों के प्रबंधन ने अभी तक सातवां वेतन पुनरीक्षण करने के लिए कोई सार्थक पहल नहीं किया है। वेतन पुनरीक्षण के प्रति प्रबंधन की उदासीन रवैए के चलते कर्मचारियों, अवर अभियंताओं एवं अभियंताओं में भारी असंतोष व्याप्त है।
समिति के सह संयोजक आशीष गुप्ता ने प्रदेश सरकार से कर्मचारियों, अवर अभियंताओं एवं अभियंताओं के ज्वलंत समस्याओं का द्विपक्षीय वार्ता द्वारा तत्काल समाधान कराने की मांग की। अंत में संयोजक निर्भयनारायण सिंह एवं मस्टरोल संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश सिंह ने संघर्ष समिति में शामिल सभी घटक संगठनों के कर्मचारियों-अधिकारियों से 29 जून को मंडल कार्यालय पर उपस्थित होकर विरोध प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील की।
इस अवसर पर महेंद्र मौर्या, शिवम राय, रविंद्र यादव, अमित कुमार, पीएन सिंह, संतोष मौर्या, श्यामनारायण सिंह, शिवदर्शन सिंह, सुरेशचंद्र सिंह, विष्णु राय, विजय राय, जीवन वर्मा, जयप्रकाश कुशवाहा, शिसकांत कुशवाहा आदि मौजूद थे। अध्यक्षता धीरेश गुप्ता ने किया।