इस बार जैसी बारिश की अपेक्षा थी, वैसी अब तक नहीं हो पाई है। इससे किसान से लेकर आमजन तक परेशान हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेत सूख रहे हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा मानसून समयावधि से लेकर अब तक 158 एमएम बारिश कम हुई है।
पिछले वर्ष जुलाई तक 240 एमएम बारिश हुई थी। इस बार जुलाई के महीने में केवल 5 दिन शेष रह गए हैं। लेकिन, अब तक 82 एमएम बारिश ही हो पाई है। जनपद में मानसून की समयावधि 15 जून से 15 सितंबर तक मानी जाती है। 15 जून से अब तक बहुत कम बारिश हुई है। इसका सीधा असर वातावरण पर देखने को मिल रहा है। प्रचंड गर्मी व उमस से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। धूप का तीखापन मई-जून का एहसास करा रहा है। दूसरी तरफ किसान भी परेशान हैं। वर्तमान में धान की रोपनी का समय चल रहा है। लेकिन, अधिकांश किसान धान की रोपनी नहीं कर पाए हैं। इसकी वजह, यह है कि जिले में ज्यादातर किसान आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वह सिंचाई के लिए मौसम के ऊपर निर्भर हैं। कृषि विभाग के आंकड़े के अनुसार जनपद में अब तक 35 प्रतिशत धान की रोपनी हो पाई है। बारिश नहीं होने के कारण जिले के कई हिस्सों में खेत की मिट्टी में दरारें पड़ गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक कपिलदेव शर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई तक 240 एमएम बारिश हुई थी। इस बार अब तक 82 एमएम बारिश हुई है।
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बारिश नहीं होने से किसानों की बढ़ी चिंता
गहमर। बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। किसान प्रतिदिन आसमान निहार रहे हैं। एक सप्ताह से बरसात नहीं हुई है। जिसके कारण किसानों को अब धान की रोपनी में संकट गहराने लगा है। चिलचिलाती धूप से जहां धान के पौधे झुलस रहे हैं। वहीं बहुत से किसान पानी भरकर जुताई किए खेतों को सुखाने लगे हैं। किसान डब्लू उपाध्याय, सुनील सिंह, जितेंद्र उपाध्याय का कहना है कि कुछ दिनों के अंदर बारिश नहीं हुई तो क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। रोहिणी नक्षत्र में डाले गए धान के बिचड़े तैयार हो चुके हैं। बारिश नहीं होने और पानी के अभाव में धान की रोपनी प्रभावित हो रही है।