ये है पूरा मामला
एसटीएफ की गौतमबुद्ध नगर यूनिट के एडिशनल एसपी राज कुमार मिश्रा ने बताया कि डिप्टी एसपी नवेंदु कुमार के नेतृत्व में दरोगा अक्षय पीके त्यागी की टीम जांच में जुटी। पड़ताल में सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से सामने आया कि बिहार के शराब तस्कर गिरोह के बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया है।
दरोगा अक्षय पीके त्यागी ने पंकज, प्रेमचंद, विनय को गाजीपुर की एसओजी की मदद से एसटीएफ की वाराणसी यूनिट के कार्यालय बुलाया गया। तीनों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर विलेंद्र को पकड़ा गया।
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घटनास्थल पर ले जाकर आरपीएफ के जवानों का पर्स खोजा जा रहा था तो प्रेमचंद गाजीपुर पुलिस के दरोगा सुरेश मौर्या की सरकारी पिस्टल छीन कर उन्हें धक्का देकर तेजी से भागा। जवाबी कार्रवाई में उसके बाएं पैर में गोली लगी। प्रेमचंद का उपचार भदौरा सीएचसी ले जाकर कराया गया।
आईटीआई-पॉलिटेक्निक पास हैं आरोपी
एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि शराब तस्कर गिरोह का सरगना रेलवे का ट्रैकमैन विलेंद्र पासी है। वर्ष 2014 में रेलवे में भर्ती हुए विलेंद्र का तबादला वर्ष 2019 में नारायणपुर हुआ तो वह मुगलसराय और अलीनगर से सुरेंद्र से शराब खरीद कर महंगे दाम में बिहार में दानापुर और पटना में बेचने लगा। धीरे-धीरे उसका संपर्क बिहार के कई शराब तस्करों से हो गया।
पंकज कुमार ने बंगलूरू से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की है। वह गांव आया तो विलेंद्र के संपर्क में आकर विनय और प्रेमचंद सहित अन्य लोगों के साथ शराब तस्करी का अवैध काम करने लगा। प्रेमचंद दानापुर से इलेक्ट्रिक ट्रेड में आईटीआई किया है। वह चार साल से शराब की तस्करी कर रहा है। हत्या और शराब तस्करी के आरोप में प्रेमचंद पहले जेल भी जा चुका है। विनय कुमार जानीपुर में बच्चों के कपड़े बेचता था। फुलवारी शरीफ के शराब तस्करों की मदद से वह विलेंद्र के गिरोह से जुड़कर काम करने लगा।
बिना स्कॉर्ट वाली ट्रेन से शराब ले जाते थे
आरोपियों ने बताया कि विलेंद्र की मदद से उन्हें पता लग जाता था कि बिहार जाने वाली किस ट्रेन में स्कॉर्ट नहीं हैं। उसी ट्रेन के जनरल श्रेणी के डिब्बे में वह शराब की खेप बिहार ले जाते थे। घटना के समय आरपीएफ के दोनों जवान सादे कपड़ों में थे और ड्यूटी पर नहीं थे। जावेद को शराब तस्कर गिरोह के बदमाश पहचान गए थे।
आरपीएफ के जवानों को शराब तस्करी की जानकारी हुई तो उन्होंने उसका विरोध किया। इससे नाराज शराब तस्कर गिरोह ने दोनों जवानों की बेरहमी से पिटाई करते हुए उनके कपड़े उतार दिए। फिर, पकड़े न जाएं, इसलिए जवानों को चलती ट्रेन से नीचे फेंक कर उनकी हत्या कर दी।