शहर के इलाकों में दौड़ाए गए बिजली के तार पूरी तरह से पेड़ की पत्तियों और टहनियों से घिरे हुए है। कई स्कूल-कालेजों के पास तार इस कदर पेड़ की पत्तियों से उझले हुए है कि तेज हवा के दौरान कब टूटकर गिर जाए या बारिश के दौरान पेड़ में करंट आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। बावजूद इसके बिजली विभाग इस खतरा को लेकर पूरी तरह से खामोश है।
पेड़ों की टहनियों और पत्तियों के बीच गुजरे तार अधिकांश आंधी के दौरान एक-दूसरे से सटने पर शार्ट सर्किट होने के बाद टूटकर गिरते रहते है। बारिश के मौसम में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इस बार बारिश के मौसम से पहले बिजली विभाग द्वारा पेड़ों के उन टहनियों की कटाई-छंटाई नहीं कराई गई, जो तार से सटे या घिरे है।
शहर के सिंचाई विभाग चौराहा स्थित सेंटमेरी कान्वेंट स्कूल के पास एक तरफ जहां एलटी का तार पुरी तरह से पेड़ से घिरा हुआ है, वहीं बगल में हाईटेंशन तार और खंभा जंगली घास लगा हुआ है। छुट्टी होने पर तार के नीचे से सैकड़ों को बच्चे गुजरते है। आपूर्ति के दौरान कभी-कभी तेज हवा के दौरान तारों के आपस में सटने से चिंगारी भी निकलती है।
कुछ इसी तरह की महुआबाग राजकीय बालिका इंटर कालेज के पास की भी है। यहां भी तार पेड़ों की टहनियों की जद में है। ऐसे तारों से एक तरफ जहां हर समय खतरे की संभावना हुई है, वहीं विभाग पूरी तरह के शामोश है। उसकी इस उदासीनता से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोई बड़ी दुर्घटना होने के बाद विभाग ऐसे खतरनाक तारों की सुधि लेगा।