गाजीपुर। गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के बाद बीते मंगलवार को घटाव शुरू हुआ। इसके दूसरे दिन पुन: नदी के स्थिर होने और सैदपुर में नदी के बढ़ने की सूचना ने तटवर्ती इलाके के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि गंगा समेत अन्य सहायक नदियों में कभी भी बढ़ाव जारी हो सकता है। इससे किनारे बसे लोगों को जिला प्रशासन पहले ही अलर्ट करने में जुटा है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, एक जुलाई से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। एक जुलाई को 54.380 मीटर, दो को 54.480 मीटर और 14 जुलाई को 55.340 मीटर और 17 जुलाई को जलस्तर 55.380 रहा। दो दिन से नदी का पानी स्थिर है। जानकारों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने की रफ्तार अगर फिर शुरू हुई तो आने वाले 10 दिन में गंगा का जलस्तर खतरे के चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर तक पहुंच सकता है। जिले में खतरे का मध्य स्तर 63.105 मीटर और उच्च स्तर 65.220 मीटर है। जल का स्तर बढ़ने से लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी है। स्थानीय नगर का अधिकतर भाग कटान की भेंट चढ़ चुका है।
कटान रोकने के लिए बोल्डर बाइंडिंग के साथ पक्का घाट बने
जमानिया। गंगा की बाढ़ हर साल इलाके मेें तबाही मचाती है। कटान से तटवासी उजड़ते बसते रहे हैं। सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में अब तक समाहित हो चुकी है। कटान से इलाके को बचाने के लिए पूर्व की सपा सरकार में दो किलोमीटर से अधिक की बोल्डर बाइंडिंग का कार्य कराया गया है और तीन पक्का घाट बनाया जा चुका है। इससे कटान को रोका जा सके। अभी तक यह प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। गंगा क्षेत्र के राघोपुर बांड़, चितावनपट्टी बांड़, खिजिरपुर बांड़, मतसा बांड़, सब्बलपुर बांड़, रघुनाथपुर बांड़, देवरिया बांड़, देवरिया दियारा सहित कर्मनाशा के तटवर्ती इलाकों में गायघाट, धुस्का, दाउदपुर, डेवढ़ी, धरोहिया, रोहुणा आदि गांव के अधिक प्रभावित होने के आसार पैदा हो गए हैं।
गंगा की लहरें तलहटी से उठकर घाट डूबोने को बेताब
औडिहार। गंगा में निरंतर हो रही वृद्धि की वजह से सैदपुर नगर के सभी घाट पानी में डूब गए हैं। तलहटी में बह रही गंगा अब तेजी से घाट के ऊपर आने को बेताब है। हालांकि गंगा का जलस्तर अभी निम्न स्तर की बाढ़ की श्रेणी में है लेकिन बुधवार केे नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। यह निरंतर चलता रहा तो गंगा शीघ्र ही मध्यस्तरीय बाढ़ को पार कर जाएगी। गंगा और गोमती की बाढ़ से सैदपुर तहसील क्षेत्र के कुल 67 गांव प्रभावित होते हैं। इनके जल दबाव की वजह से इनसे जुड़ी गोमती, गांगी आदि नदियां भी उफान पर हो जाती है। फिलहाल गंगा की बाढ़ से निचले एवं तराई क्षेत्रों में की गई सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचने लगा है। सैदपुर क्षेत्र के जोहरगंज, रामतवक्का, पटना, फुलवारी, टोडरपुर, चकेरी आदि गांवों में गंगा के तट पर बोई गई परवल, राम तरोई, बोड़ा, भिंडी, करेला व सीताफल जैसी सब्जी को नुकसान हुआ है। दो दिन से पांच से आठ सेंटीमीटर बढ़ रही गंगा नदी के किनारे बसे लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। तहसीलदार दिनेश कुमार ने बताया कि बाढ़ से निबटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पर्याप्त नावों के अलावा अन्य राहत संबंधी व्यवस्था का बंदोबस्त किया जा चुका है। देखा जाए तो गंगा खतरे के निशान से अभी काफी नीचे हैं।
तटवर्ती गांवों में बाढ़ के साथ ही शुरू होती है तबाही
मुहम्मदाबाद। गंगा के जलस्तर में वृद्धि के बाद बुधवार को जलस्तर के स्थिर रहने पर तटवर्ती गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। तहसील क्षेत्र के गौसपुर से बीरपुर तक लगभग 20 किलोमीटर में गंगा किनारे शेरपुर, सेमरा, बच्छलकापूरा, गौसपुर, बीरपुर सहित दर्जनों गांव गंगा का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ते ही उनके खेतों में पानी पहुंचने से फसल तबाह हो जाती है और जलस्तर घटने पर कटान की चिंता सताने लगती है। जलस्तर स्थिर होने पर गंगा किनारे बसे गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है।