पशु तस्कर तू डाल-डाल तो मैं पात-पात की कहावत चरित्रार्थ कर रहे हैं। दिन हो या रात, बछड़े के सहारे पशुओं की धड़ल्ले से तस्करी हो रही है। सोमवार की रात पड़ताल में यह बात सामने आई। तस्कर दिन में विभिन्न गांवों में रुककर पशुओं को बांधते हैं। रात होने पर धरम्मरपुर होते हुए गंगा पुल पार कर बिहार की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। जमानिया का इलाका पशु तस्करी के लिए सेफ जोन बन चुका है। पशुओं से भरे वाहन जमानिया तक तीन हजार तो बिहार बाॅर्डर तक पहुंचाने के नाम पर पांच हजार रुपये भाड़ा निर्धारित है।
तस्कर पशुओं को वाहन में लादकर नंदगंज के पास से गांव होते हुए मानिकपुर कोटे गांव पहुंचते हैं। जहां से गांगी नदी पुल पारकर सीधे करंडा थानाक्षेत्र के ब्राह्मणपुरा होकर विभिन्न गांवों के लिए निकल जाते हैं। पता करने पर जानकारी मिली कि तस्कर खासकर सरैया, गजाधर, विशुनपुर, महाबलपुर सहित अलग-अलग गांवों में पशुओं को बांध देते हैं। इसके बाद वहां पर पहले से रखे गए एक-एक गाय के साथ एक-एक बछड़ा लादकर आराम से धरम्मरपुर गंगा पुल पारकर जमानिया पहुंचा देते हैं। जबकि रात में तीन से चार स्पोर्ट्स बाइक आगे-आगे चलते हैं। इस पर सवार तस्कर वाहन चालकों को लोकेशन बताते रहते हैं, जिसके सहारे पशुओं को जमानिया के पास एकत्र किया जाता है। इसके बाद बिहार घाट होते हुए बड़े आराम से पशुओं को पार करा देते हैं। बमुश्किल 25 किमी की दूरी एक बार तय करने के नाम पर चालकों को तस्कर मोटी रकम भी देते हैं। बछड़े के सहारे एक-एक पशुओं की हो रही तस्करी पर पुलिस को शक भी नहीं होता है और वे आराम से निकल जाते हैं।
बडौरा और ढेवढी पुलिया से जाते हैं बिहार
महली गांव के पास पिकअप पलटने से 30 जनवरी को सात गोवंश की मौत हो गई थी। 21 जनवरी को कांशीराम आवास के पास स्कॉर्पियो पलटने से एक गोवंश की मौत हो गई। जबकि चार जीवित मिले थे। तस्कर करंडा की ओर से जमानिया धरम्मरपुर सेतु से होकर हेतिमपुर‚ स्टेशन‚ अभईपुर‚ महल‚ ककरैत आदि से होते हुए बडौरा और ढेवढी पुलिया से बिहार निकल जाते हैं।