यूपी बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में सफलता अर्जित करने वाले अधिकांश मेधावियों का रहन-सहन का स्तर बेहद सामान्य है। ग्रामीण परिवेश में रहने वाले गुदड़ी के इन लालाें ने कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए किसी तरह पढ़ाई की। लगन और निष्ठा के बलबूते इन होनहारों ने यह साबित कर दिया की प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती है।
यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाली चेतना यादव और इंटरमीडिएट में सफलता पाने वाली पूजा मौर्य की घर की घरेलू स्थिति सामान्य है। चेतना के पिता जहां एक विद्यालय में अध्यापक है वहीं पूजा मौर्य के पिता खेतीबारी करते है।
इसी तरह हाईस्कूल की किरन यादव, सुषमा यादव, इंटर की कंचन यादव, प्रीति यादव, छाया यादव, आभा यादव के अलावा कुछ अन्य मेधावियों के परिवार के रहन-सहन का स्तर सामान्य है। सामान्य परिवार के इन होनहारों ने कठिन परिस्थितियों से हार न मानते हुए निष्ठा और लगन के साथ पठन-पाठन कर बोर्ड परीक्षा में कामयाबी हासिल की। गुदड़ी के इन लालाें ने अपनी मेहनत से यह सबित कर दिया की अगर मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो सफलता खुद-ब-खुद कदम चूमती है।