गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में 12 करोड़ की लागत से सीआरएस फंड से स्थापित मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) से 11 जनवरी तक जांच की कोई गुंजाइश नहीं है। वजह प्रतिदिन 15 मरीजों की ही जांच हो पा रही है। ऐसे में स्लॉट बुकिंग तत्काल जांच की सुविधा में खलल डाल रही है। यही नहीं तीन दिन पूर्व हुए उद्घाटन के बाद नए सीटी स्कैन मशीन का संचालन शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में पुराने सीटी स्कैन मशीन पर ही प्रतिदिन करीब 80 से 90 मरीजों का भार पड़ रहा है। इधर, 50 प्रतिशत तक छूट वाली अमृत फार्मेसी दवा के लिए लाइन तो लग रही है, बावजूद बाहर निजी मेडिकल स्टोरों पर मरीजों व तीमारदारों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है, जबकि 1350 प्रकार की दवा का दावा किया जा रहा है। वहीं, संचालित हो रहे चार ओटी में तीन दिन में 75 से अधिक सर्जरी हो चुकी है।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 26 सितंबर को मेडिकल कॉलेज 300 बेड के सात मंजिला अस्पताल में एक ही छत के नीचे जांच, दवा और उपचार की सुविधा से लैस नए सुविधाओं का लोकार्पण किया था। सोमवार को इन नए सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानी तो पता चला कि एमआरआई जांच के लिए मरीजों को चार माह तक इंतजार करना पड़ेगा। वजह यहां एक दिन में 15 ही मरीजों की जांच हो पा रही है। ऐसे में जांच के लिए ओपीडी पर पर्चे पर 11 जनवरी के बाद की तिथि मिल रही थी। जबकि नए सीटी स्कैन का संचालन न होने से पुराने सीटी स्कैन पर ही मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। एक दिन करीब 90 मरीजों की जांच हुई थी। हालांकि, राहत यह रही कि सीटी स्कैन जांच में अगले दिन की डेट नहीं मिल रही थी लेकिन जांच के लिए तीन से चार घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। यही हाल 50 प्रतिशत तक छूट वाले अमृत फार्मेसी पर देखने को मिला। मरीजों एवं तीमारदारों की लंबी कतार लगी हुई थी, लोग दवा लेने के लिए करीब 25 से 30 मिनट तक इंतजार करते दिखाई पड़े।
बाहर 12 हजार तो अस्पताल में 3500 में एमआरआई
एमआरआई के लिए निजी केंद्रों पर मरीजों को जांच के लिए 9000 से 12 हजार रुपये तक जेब से खर्च करने पड़ते हैं। जबकि अस्पताल में 2000 से 3500 रुपये एमआरआई आसानी से हो जा रही है। ऐसे में मरीजों की भीड़ बढ़ने से अब स्लॉट की बुकिंग शुरू हो चुकी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि तत्काल सुविधा के नाम पर मरीजों को निजी केंद्रों का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
दो जनरल सर्जरी, एक आर्थो तो एक ईएनटी व डेंटल की ओटी
मेडिकल कॉलेज के 300 बेड अस्पताल में चार ओटी कक्ष का उद्घाटन उप मुख्यमंत्री ने किया था। 26 सितंबर से लेकर अब तक 75 गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की सर्जरी हो चुकी है। यहां जनरल सर्जरी की दो, आर्थो का एक और ईएनटी व डेंटल विभाग की एक ओटी स्थापित की गई है। सबसे अधिक मरीजों की जनरल सर्जरी हुई है। वहीं महिला संबंधित बीमारियों की सर्जरी हुई है।
सोमवार को 4400 की हुई ओपीडी
मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को जनपद के दूर-दराज इलाकों के अलावा गैर जनपद और प्रांत से पहुंचे मरीजों ने अपना उपचार कराया। शाम तीन बजे तक 4400 मरीज उपचार कराने अस्पताल पहुंचे थे। वहीं, 15 मरीजों की एमआरआई जांच हुई, जबकि पुराने सीटी स्कैन कक्ष में 90 मरीजों का सीटी स्कैन हुआ है।
बाहर केंद्रों पर सीटी स्कैन पर चार हजार खर्च
गाजीपुर। बाहर निजी केंद्रों पर साधारण सीटी स्कैन - जैसे ब्रेन या सिर का स्कैन पर 1500 से 4000, कंट्रास्ट सीटी स्कैन जिसमें विशेष डाई का उपयोग होता है उसमें 5000 से 8500, सीटी एंजियोग्राफी या जटिल स्कैन पर 10000 से 15000 और पूरे शरीर का सीटी स्कैन पर 8,000 से 15,000 या उससे अधिक का खर्च आता है।
एक दिन में 15 मरीजों की ही एमआरआई हो पाती है। यहां दो टेक्नीशियन तैनात है। अमृत फार्मेसी पर 1350 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं। नई सीटी स्कैन का संचालन एक सप्ताह में शुरू हो जाएगा, जिससे पुराने सीटी स्कैन पर पड़ रहा भार कम हो जाएगा। अमृत फार्मेसी पर जल्द ही कुल चार हजार प्रकार की दवाइयां मिलनी शुरू होगी, जिससे मरीजों को सुविधा होगी।- प्रो. आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अस्पताल गाजीपुर
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में अमृत फार्मेसी पर लाइन में लगे लोग। संवाद
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में अमृत फार्मेसी पर लाइन में लगे लोग। संवाद