गाजीपुर। मऊ से चारों युवकों का शव दोपहर 2:20 बजे नरवर गांव पहुंचा। गांव के तीन रास्तों से जब चार अर्थियां निकलीं तो लोग रो पड़े। गाजीपुर श्मशान घाट पर आसपास चार चिताएं सजाई गईं थीं। कन्नू यादव कभी बड़े बेटे रविंद्र उर्फ कल्लू तो कभी छोटे बेट गोरख उर्फ अजय के चेहरे को छूकर फफक पड़ते।
चार लाख वोल्ट के तार की चपेट में आने से झुलसे रविंद्र यादव, गोरख यादव, अमन यादव और छोटू यादव को लोग उपचार के लिए मऊ ले गए थे। वहां चारों की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराकर पुलिस ने शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया। नरवर में एक घर से दो सगे भाइयों रविंद्र और गोरख की तो थोड़ी दूर से अमन की अर्थी निकली। यहां से करीब 300 मीटर दूर छोटू यादव की अर्थी निकलकर एक साथ मुख्य मार्ग मऊ-गाजीपुर पर पहुंची। रविंद्र और गोरख को पिता कुन्नू यादव, अमन को हीरालाल यादव और छोटू यादव को बड़े भाई भरत यादव ने मुखाग्नि दी।
नरवर गांव में हुए हादसे के बाद घरों में मातम पसर गया। हर जुबान पर यही घटना रही। करीब एक दर्जन से अधिक घरों में चूल्हे नहीं जले। हर कोई इस दर्द और पीड़ा से व्यथित दिखाई पड़ा।
शव गांव पहुंचने के बाद चारों तरफ चीत्कार मच गई। पंथी सुरेंंद्र यादव पूजा मंडप और स्थल पर दौड़-दौड़ कर बिलख रहे थे। उनके मुंह से बस यही निकल रहा था कि यह क्या हो गया। लोग उन्हें रोक कर सांत्वना देने का प्रयास कर रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय पहलवान और अंबेडकर नगर में पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद पर तैनात रविंद्र यादव उर्फ कल्लू 10 दिन का अवकाश लेकर पूजा में शामिल होने घर आए थे। श्मशान घाट पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंतिम सलामी देने के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोगों की आंख नम हो गईं।
पंथी सुरेंद्र यादव की तीन पीढि़यां काशीदास बाबा की पूजा करा रही हैं। सुरेंद्र यादव के बाबा गौरी पंथी काशीदास बाबा की पूजा कराते थे। इसके बाद चाचा शिवनंदन पंथी पूजा कराते थे। उनके निधन के बाद सुरेंद्र यादव पंथी काशी दास बाबा की पूजा जनपद ही नहीं बिहार, झारखंड, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ से लेकर पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी कराते थे। देवरिया से सुरेंद्र यादव गत 20 मई को पूजा कराकर आए थे। उन्हें 22 मई को पूजा कराने मिर्जापुर जाना था।
काशी दास बाबा की पूजा एक विशेष प्रकार की पूजा है, जो अहीरों (पशुपालकों) द्वारा की जाती है। इसमें जानवरों की भलाई के लिए पूजा की जाती है, जिसमें विशेष रूप से अहीरों के पशुओं को लाभ होता है। यह पूजा मन्नत पूरी होने पर भी की जाती है। काशी दास बाबा अहीरों के देवता माने जाते हैं। पूजा के दौरान, कड़ाही में पूड़ी, खीर आदि बनाई जाती है, जिसे पंथी अपने हाथों से निकालते हैं और प्रसाद के रूप में बांटते हैं।