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Ghazipur News: अफसरों की गोद में ‘अनाथ’ 99 परिषदीय विद्यालय

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बाउंड्रीवाल विहीन कंपोजिट विद्यालय कुर्था। संवाद
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गाजीपुर। वर्ष 2022 में बड़े-बड़े दावे और प्रचार के साथ शुरू किए गए स्कूल चलो अभियान की हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। जिले के 99 अधिकारियों ने 99 परिषदीय विद्यालयों को गोद लेकर उन्हें मॉडल स्कूल बनाने का वादा किया था, लेकिन चार वर्ष बाद भी अधिकांश विद्यालय बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कहीं बाउंड्रीवाॅल नहीं है, कहीं जर्जर भवन बच्चों के लिए खतरा बने हैं तो कहीं पानी और साफ-सफाई तक की व्यवस्था नहीं है। सरकारी दस्तावेजों में विद्यालयों के कायाकल्प की तस्वीर चमकदार दिखाई गई, लेकिन शनिवार को पड़ताल में जमीनी हालात खराब मिली। कई स्कूलों में जिम्मेदार अधिकारी चार वर्ष से नहीं पहुंचे है। हालात यह हैं कि कुछ अधिकारियों को अब यह भी याद नहीं कि उन्होंने कौन सा विद्यालय गोद लिया था।
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डीएम ने गोद लिया स्कूल, फिर भी नहीं बनी बाउंड्रीवाॅल : तत्कालीन डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने प्राथमिक विद्यालय कुर्था (सदर) को गोद लिया था। उम्मीद थी कि यह विद्यालय मॉडल स्कूल बनेगा, लेकिन आज भी यहां बाउंड्रीवाॅल नहीं है। स्कूल परिसर से होकर बाहरी लोगों और जानवरों का आवागमन होता है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की दशा वर्षों से जस की तस बनी हुई है।
डीआईओएस के विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता खराब : प्राथमिक विद्यालय बकुलियापुर को तत्कालीन डीआईओएस ने गोद लिया था, लेकिन चार साल बाद भी विद्यालय तक जाने वाला खड़ंजा मार्ग दयनीय स्थिति में है। विद्यालय में कई बार चोरी हो चुकी है और जर्जर दीवारें हादसे को दावत दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदारों ने सिर्फ कागजों में स्कूल गोद लिया है।
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बीएसए के स्कूल में पानी और सफाई की बदहाली : तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने प्राथमिक विद्यालय सरैया (सदर) को गोद लिया था। शिक्षा विभाग के सबसे बड़े अधिकारी के गोद लिए विद्यालय में ही पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था लचर मिली। परिसर में गंदगी फैली रही और बच्चों को स्वच्छ पेयजल तक नसीब नहीं हो पा रहा है। जब विभागीय मुखिया के गोद लिए विद्यालय का यह हाल है, तो बाकी स्कूलों क्या होगा।
कागजों में दौड़ रहा अभियान जिम्मेदारों के नंबर तक गायब : पड़ताल में यह भी सामने आया कि सरकारी सूची में कई ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और प्रभारियों के मोबाइल नंबर गलत दर्ज हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिम्मेदारों से संपर्क तक संभव नहीं है, तो स्कूलों की निगरानी और विकास कैसे होगा।
गोद लिए गए स्कूलों में सुविधाओं का विकास करने के लिए शासन की ओर से कोई विशेष बजट आवंटित नही है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर धन की व्यवस्था करने के साथ ही सीएसआर फंड की मदद से स्कूलों में सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही जिन स्कूलों में बाउंड्री वॉल नहीं है, वहां मनरेगा /बीवीजीरामजी के तहत वाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाएगा। - अनुपम शुक्ला, डीएम, गाजीपुर।
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