फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: हर महीने 8.24 करोड़ खर्च, कर्मचारियों की रोज लगती है हाजिरी पर नहीं होती सफाई

विज्ञापन
पड़ताल वाली खबर में....रेवतीपुर विकासखंड के नवली गांव के पास एनएच-124 सी के किनारे फेंका गया कू
विज्ञापन
गाजीपुर। जनपद की कुल 1238 ग्राम पंचायतों के 26 प्रतिशत ग्राम पंचायतों यानि 321 में स्थिति ज्यादा नारकीय है। जनपद के महेशपुर द्वितीय, बभनौली, हंसराजपुर, मरदह, गौरा, नवली आदि गांवों में स्वच्छता अभियान फेल है। जबकि एक से 30 अप्रैल तक जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया गया। अभियान के तहत दावा किया गया कि जनपद के एक-एक गांव को स्वच्छ करने का दावा किया गया है।
विज्ञापन

पंचायती राज विभाग की ओर से 3298 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है। इनके मानदेय पर विभाग हर महीने 8.24 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके बावजूद जनपद के गांव कूड़े के ढेर से पटे नजर आ रहे हैं।ग्रामीण रामबदन बिंद, सोमारु चौहान, रामदरश आदि का कहना है कि गांवों में सफाईकर्मियों की तैनाती तो की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश गांवों में सफाईकर्मी ड्यूटी पर आते ही नहीं हैं। उपस्थिति पंजिका में केवल उनकी हाजिरी दर्ज होती है। ग्रामीणों के अनुसार यह मिलीभगत का खेल है, जिससे विभाग भी अनजान नहीं है, लेकिन वह आंखें मूंदे हुए है। ड्यूटी पर आए बिना ही सफाईकर्मी हर महीने वेतन ले रहे हैं। इसकी पुष्टि गांव-गांव लगे कूड़े के ढेर से होती है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) केवल फाइलों और आंकड़ों तक सीमित रह गया है। करीब एक महीने बाद जनपद में मानसून की दस्तक हो जाएगी। इसके बाद बारिश में कूड़े के ढेर बजबजाने लगेंगे। एक ओर गांवों की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं।
विज्ञापन

भांवरकोल क्षेत्र के महेशपुर द्वितीय गांव में कूड़े का अंबार लगा है। यह स्थिति किसी एक दिन की नहीं, बल्कि प्रतिदिन बनी रहती है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन जिम्मेदारों ने अनसुना कर दिया। रेवतीपुर विकासखंड क्षेत्र के नवली गांव के पास एनएच-124 सी के किनारे कूड़े का ढेर लगा है। इससे उठने वाली बदबू के कारण आवागमन करने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रधान के यहां लगाते हैं दरबार

जिले के ग्रामीण इलाकों के ज्यादातर सफाईकर्मी सफाई का कार्य करने से परहेज करते हैं। सफाई कार्य से बचने के लिए कई सफाई कर्मी संबंधित ग्राम प्रधान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। वहीं कई सफाईकर्मी ऐसे भी हैं, जिनको ब्लॉक व विभिन्न कार्यालयों से संबद्ध किया गया है। ऐसे में गांवों में स्वच्छता अभियान की बात करना बेमानी है।

हर गांव में एक-दो ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां ग्रामीण कूड़ा फेंकते हैं। इन ब्लैक स्पॉट से सप्ताह में एक दिन कूड़े का उठान आरआरसी सेंटर के लिए किया जाता है। - रमेशचंद्र उपाध्याय, डीपीआरओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें