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नाड़ियों के शुद्घिकरण के लिए करना चाहिए सिद्धासन

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सुहवल(गाजीपुर)। विश्व योग दिवस से पूर्व क्षेत्र के विभिन्न गांवों में योग कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। स्थानीय इंटर कालेज के परिसर में शनिवार को आयोजित योग कक्षा में योगाचार्य अमित पांडेय ने सिद्धासन के तरीके और लाभ की जानकारी दी । इस आसन को करने से ब्रह्मचर्य कि प्राप्ति में सहायक होता है। नाड़ियों के शुद्धिकरण में इस आसन का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि यह आसन मानसिक ठहराव देते हुए सूक्ष्मनाड़ी से प्राण का प्रवाह सुनिश्चित करता है। कुंडलिनी जागरण में सहायता करता है। नाड़ियों के शुद्धिकरण में इस आसन का नियमित अभ्यास करना चाहिए। इस योग से पूरे शरीर में ताजगी आ जाती है। इस आसन के अभ्यास से 72 हजार नाड़ियों की अशुद्धियों को दूर किया जा सकता है। सिद्धासन ध्यान के लिए भी होता है, यह आसन ध्यान के लिए उत्तम माना गया है। साथ ही साथ आपके मन को एकाग्र करने में बड़ी भूमिका निभाता है। इस आसन को करने से मन मस्तिष्क तेज होता है। विशेषकर यह आसन छात्र एवं छात्राओं के लिए यह एक उम्दा योगाभ्यास है।
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