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75 स्कूली वाहन बिना फिटनेस भर रहे थे फर्राटा, नोटिस जारी

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जिले में संचालित निजी विद्यालयों के फर्राटा भर रहे 75 वाहनों का फिटनेस नहीं है। संबंधित अधिकारी दो दिन पूर्व संचालकों को नोटिस जारी करने और फिटनेस के लिए एक सप्ताह का समय शेष होने की चेतावनी देने का दावा कर रहे हैं। जबकि संचालित 884 स्कूली वाहनों में 809 का फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी हो चुका है। इधर स्थिति यह है कि ग्रामीण इलाकों में संचालित विद्यालय के वाहनों पर फोन नंबर भी नहीं दर्ज होता है और सीट से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है।
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कोरोना संकट काल के दौरान विद्यालय बंद थे। दो साल से बंद निजी स्कूलों के संचालन से एक बार फिर इनके बसों ने फर्राटा भरना तो शुरू कर दिया। जबकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपनी जवाबदेही अब तक तय नहीं कर पाए हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी विद्यालयों के वाहनों का है। इन इलाकों में मैजिक जैसे छोटे वाहनों का संचालन बच्चों को घर से लाने ले जाने के लिए किया जाता है, लेकिन जरूरी उपकरणों का इन वाहनों में दूर-दूर तक पता नहीं रहता है। यहीं नहीं वाहनों पर विद्यालय के नाम, पता और मोबाइल नंबर भी नहीं दर्ज रहते हैं। छात्रों को सीट की क्षमता से अधिक भरकर वाहनों का संचालन किया जाता है, जिससे हादसे का भय बना रहता है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 884 स्कूली वाहनों का संचालन हो रहा है। इसमें मानक को पूर्ण करने वाले 809 वाहनों को फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी हो चुका है। जबकि 75 ऐसे वाहन जिनमें खामियां हैं, जैसे खिड़कियों में चार राड नहीं लगे हैं, हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट नहीं है। इस संबंध में एआरटीओ राम सिंह ने बताया कि जिले में संचालित 884 स्कूली वाहनों में 809 वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी हो गया है। 75 वाहन संचालकों को नोटिस कर एक सप्ताह के अंदर फिटनेस प्रमाण-पत्र लेने का निर्देश दिया गया है।
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दो वाहन सीज, 12 का चालान
जिले के ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर बिना फिटनेस प्रमाण-पत्र के फर्राटा भर रहे स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। एक सप्ताह में जहां दो वाहनों को सीज किया जा चुका है। वहीं 12 वाहनों का चालान किया गया है। यह अभियान लगातार चलता रहेगा, जिससे मानक विहीन ऐसे स्कूली वाहनों पर अंकुश लगाया जा सके।
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