गाजीपुर। गंगा के तटीय इलाके में किसानों ने पशुओं को खिलाने के लिए सैकड़ों एकड़ चारे की खेती की है। गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने की वजह से किसानों की चिंता इस बात से बढ़ गई है कि अगर जलस्तर और थोड़ा बढ़ा तो चारा पानी में डूब जाएगा। इसके मद्देनजर किसान आनन-फानन में चारा की कटाई करने में जुट गए हैं। क्योंकि पिछले साल गंगा में आई बाढ़ से भारी मात्रा में चारा पानी में डूबकर बर्बाद हो गया था, जिससे पशुपालकों के सामने चारे का संकट उत्पन्न हो गया था।
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के तटवर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में किसान पशु चारा के साथ ही सब्जियों की खेती करते हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने का क्रम भी शुरू हो गया है। जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे तटवर्ती इलाकों में खेती करने वाले किसानों के माथे पर बल पड़ने लगा है। लोग आनन-फानन में पशु चारा सहित अन्य फसलों की कटाई कर उसे सुरक्षित करने में जुट गए हैं। शहर के गोराबाजार स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर के पास गंगा किनारे गुरुवार को दर्जनों महिला और पुरुष किसान चारा की कटाई करने में जुटे हैं। किसान मोती ने बताया कि गंगा का तेजी से बढ़ रही हैं। अगर समय से चारा नहीं काटा गया और उसे सुरक्षित नहीं किया गया तो वह पानी से घिर जाएगा। इसके बाद उसे काटना संभव नहीं हो सकेगा। हम लोगों के सामने चारे का संकट उत्पन्न हो जाएगा। मालूम हो कि पिछले वर्ष गंगा नदी में आई बाढ़ से भारी मात्रा में पशु चारा सहित अन्य फसलें डूबकर खराब हो गई थी, जिससे किसानों को भारी क्षति पहुंची थी।