महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज मेंं मॉर्च्यूरी हाउस संचालित हुए करीब तीन वर्ष बीतने को हैं लेकिन स्थिति यह है कि 12 शवों को रखने के लिए रखा छह फ्रीजर अनगिनत बार खराब हो चुका है।
वर्तमान में पांच फ्रीजर चार माह से खराब पड़े हुए हैं, जबकि कागजों में ‘आल इज वेल’ है। हर बार सिर्फ जुबानी मरम्मत कराकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसे में वर्तमान में मात्र एक फ्रीजर के संचालित होने और गर्मी में तापमान बढ़ने से सड़न और दुर्गंध की मुसिबत बढ़ती दिखाई पड़ रही है।
सड़क और ट्रेन हादसों के अलावा अन्य किन्हीं कारणों से मौत होने पर पोस्टमार्टम कराने से पूर्व शवों को मॉर्च्यूरी हाउस में सुरक्षित रखने के लिए भेजा जाता है। यहां लगे छह फ्रीजरों में दो-दो शवों को मिलाकर कुल 12 शवों को रखने का इंतजाम किया गया है लेकिन स्थिति यह है कि इन छह फ्रीजरों में से पांच के खराब होने से शवों को फर्श पर ही रखना पड़ रहा है।
खासकर लावारिस शवों के फ्रीजर में न रखने से दुर्गंध और सड़न के चलते मॉर्च्यूरी में शवों को रखने और निकालने में लगे कर्मियों को काफी परेशानी होती है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन फ्रीजरों के मामले में ऑल इज वेल का दावा करता है, जबकि हकीकत अलग है।
वहां तैनात एक कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि फ्रीजर का गैस तो खत्म हो गया है। साथ ही दरवाजा भी टूटा है। सिर्फ जुबानी ही कहा जाता है कि दुरुस्त करा दिया गया है, जबकि हकीकत कुछ अलग है। ऐसे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।