ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों से संबंधित जरूरी सामान की व्यवस्था कराने के जन आरोग्य समिति (जेएएस) का गठन किया गया है। वहां निर्बाध बिजली, पानी, कुर्सी, टेबल और ओपीडी सहित अन्य जरूरत के सामान की खरीद के लिए प्रति पीएचसी एक वर्ष में 87500 रुपये स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध कराता है लेकिन खर्च तो दूर राशि जस का तस डंप पड़ी हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज 41 दिन शेष बचे हैं। जबकि महज 30.47 फीसदी धनराशि ही खर्च हो सकी है।
दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को उनके घर के आसपास ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित कराए गए हैं। साथ ही केंद्रों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को बिजली, पानी के अलावा बैठने के लिए कुर्सी, टेबल और ओपीडी संबंधित पर्ची और अन्य जरूरत के सामान की खरीदारी के लिए जेएएस के तहत धनराशि भी उपलब्ध कराई गई है। बावजूद इसके स्थिति यह है कि ज्यादातर पीएचसी की हालत खराब है। टेबल, कुर्सी तो दूर, प्यास बुझाने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं है। गर्मी के दिनों में पंखा न होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खास बात यह है कि कई ऐसे पीएचसी संचालित हो रहे हैं, जिसके परिसर में जंगली घास उगी हैं। साफ-सफाई न होने से मरीजों को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
जन आरोग्य समिति के तहत 60 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को शामिल किया गया है। समिति के खाते का संचालन जिला पंचायत सदस्य अथवा बीडीसी करते हैं। पांच सदस्यों की कमेटी भी गठित है, बावजूद इसके धनराशि के खर्च पर नजर डाली जाए तो सैदपुर ब्लाॅक के पीएचसी पर बजट का 15.11 प्रतिशत, भदौरा में 17.50 प्रतिशत, रेवतीपुर में 15.53 प्रतिशत और गोड़उर से संबद्ध पीएचसी पर बजट का 19.10 प्रतिशत धनराशि ही खर्च हो पाई है।