गाजीपुर। जिले के तीन सौ से अधिक परिषदीय विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है। जबकि इसमें कई ऐसे हैं जो तालाब-पोखरे और सड़क के किनारे हैं। ऐसे में स्कूल की छुट्टी या मध्यावकाश के समय बाउंड्री विहीन स्कूलों में खेलते समय बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। ऐसे स्कूलों की सबसे ज्यादा संख्या कासिमाबाद विकासखंड क्षेत्र में है। बजट के अभाव मेंइसका निर्माण कराना विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए उनका कायाकल्प कराया जा रहा है। जिले में कुल 2266 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें 1462 प्राथमिक, 350 उच्च प्राथमिक एवं 454 कंपोजिट स्कूल हैं। सुरक्षा मानकों के तहत विद्यालयों में चहारदीवारी होना जरूरी है। इससे इतर जिले के 322 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बाउंड्री नहीं है।
ऐसे कई विद्यालय या तो सड़क के किनारे हैं या फिर तालाब-पोखरों से सटे हैं। ऐसे में बच्चों के स्कूल आते-जाते हर वक्त भय बना रहता है। मध्यावकाश में जब बच्चे एमडीएम खाने के बाद खेलने जाते हैं तो चिंता और बढ़ जाती हैं। शिक्षक और अभिभावक दोनों ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहमे रहते हैं। सबसे ज्यादा चहारदीवारी विहीन विद्यालय कासिमाबाद विकासखंड क्षेत्र में हैं जबकि जिले के नगरीय क्षेत्रों में भी सात स्कूल हैं।
जानकारी के अनुसार सैदपुर में 18, मरदह 4, बाराचवर 23, बिरनो 15, मनिहारी 15, भांवरकोल 20, करंडा 18, जमानिया 16 और कासिमाबाद में 46 विद्यालय चहारदीवारी विहीन हैं। इसके अलावा मुहम्मदाबाद 24, देवकली 31, सदर 14, भदौरा 26, जखनिया 12, सादात 18 एवं रेवतीपुर ब्लाॅक क्षेत्र के 15 विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है।
परिसर में घूमते हैं मवेशी
गाजीपुर। चहारदीवारी विहीन विद्यालय पशुओं का चरागाह बने हैं। इनके परिसर में पूरे दिन पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। वहीं छुट्टी के दिनों में शरारती तत्व जमा रहते हैं। चोर-उचक्कों का भय रहता है। परिसर में रखे एमडीएम के बर्तन, सिलेंडर, फर्नीचर और अन्य जरूरी कागजातों की सुरक्षा को लेकर भय बना रहता है।
क्षेत्र एवं ग्राम पंचायतों के माध्यम से आपरेशन कायाकल्प के तहत चहारदीवारी निर्माण कराने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर विभाग गंभीर है। - हेमंत राव, बेसिक शिक्षा अधिकारी