गाजीपुर। जिले में एक जुलाई से वन महोत्सव का प्रारंभ किया जाएगा। करीब एक सप्ताह तक चलाए जाने वाले इस कार्यक्रम के दौरान हर प्रकार के पौधों का रोपण किया जाएगा। इस बार जिलें में 31 लाख 43 हजार 360 पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए विभाग वार लक्ष्य दिया गया है। पौधों की कमी नहीं है क्योंकि जिले के विभिन्न विकास खण्डों की सभी 26 नर्सरियों में 60.84 लाख पौधो को तैयार किया गया है।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के निदेशक गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने शनिवार को बताया कि वन महोत्सव के अवसर पर पूरे प्रदेश में एक ही दिन में 25 करोड़ पौधरोपण कार्यक्रम ‘‘ 25 करोड़ वृक्षारोपण मिशन‘‘ 2020 को जैविक पद्धति केन्द्रित मिशन बनाया जा रहा है। जिले में लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई विभागों को शामिल किया गया है। एक सप्ताह तक जम कर पौधरोपण किया जाएगा तथा उसके बाद भी लक्ष्य पूरा होने तक यह काम चलता रहेगा। इस लक्ष्य में सर्वाधिक पौधरोपण ग्राम विकास विभाग को 12 लाख 56 हजार आठ सौ पौधे, वन विभाग को 10 लाख 81 हजार 500 एवं 11 हजार 275 पौधे गंगा नदी से पांच सौ मीटर दोनों तरफ लगाये जा रहे है।
उन्होंने बताया कि जनपद में 26 विभागों के माध्यम से दिये गये लक्ष्य के सापेक्ष पौध रोपण किया जाना है। जिसमें पर्यावरण विभाग को 54100 , राजस्व विभाग 142100 पौधे, पंचायती राज विभाग को 142100, आवास विभाग 4600, औद्योगिक विकास को 2800, नगर विकास विभाग को 16600, लोक निर्माण विभाग 7000, जल शक्ति विभाग को 7000, रेशम विभाग को 20100, कृषि विभाग को 240740, पशुपालन विभाग को 4500, सहकारिता विभाग को 5700, उद्योग विभाग 6000, विद्युत विभाग 3800, माध्यमिक शिक्षा विभाग 2860, बेसिक शिक्षा विभाग 2860, प्राविधिक शिक्षा 4100, उच्च शिक्षा विभाग 15600, श्रम विभाग 2200, स्वास्थ्य विभाग को 7100, परिवहन विभाग को 2200, रेलवे विभाग को 14900, रक्षा विभाग को 4600, उद्यान विभाग को 86500 और पुलिस विभाग को 5000 पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है।
पौधरोपण के दौरान शीशम, जामुन, अर्जुन, सहजन, खैर, गुटैल, सागौन, सिरस, कंजी, बरगद, आम, अमरूद, बास, पीपल, पाकड़ आदि पौधे सहित आठ ओषधिय प्रजाति जिसमें खस, लेमनग्रास, वच, कालमेघ, तुलसी, बेल, सतावर, आवला मिलाकर कुल 53 प्रजातियो के पौधे लगाए जाएंगे। विशेषकर महिलाओं व बच्चो में कुपोषण की समस्या देखते हुए वृक्षारोपण मिशन 2020 के अन्तर्गत जनपद के प्रत्येक ग्राम के आवास के परिसर में सहजन का पौधा अनिवार्य रूप से रोपित किया जायेगा। इस हेतु विभागीय पौधशाओ मे सहजन के 2.52 लाख से अधिक पौधे उपलब्ध है। सहजन की पत्तियों एवं फलो में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए बी सी व डी तथा प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
सहजन के पत्तियों बीज व फल से गठिया, मधुमेय, चर्मरोग सहित विभन्न प्रकार के रोगो की औषधियां तैयार होती है। वायरस एवं बैक्टीरिया जनित रोगों का सामना करने के लिए अमरूद, शहतूत, जामुन, आवला, बेल, बहेड़ा, महुआ, आम, इमली, सहित 18 से अधिक फलदार प्रजातियों की लगभग छह करोड़ 48 लाख पौधे विभागीय पौधशालाओं में उगाए गए है।