गाजीपुर। डीएपी की किल्लत को दूर करने के लिए शासन स्तर पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसके तहत निर्देश दिया गया है कि निजी कंपनियों की 30 प्रतिशत डीएपी का वितरण समितियों के माध्यम से किया जाए। शासन के फरमान को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में कृषि विभाग लग गया है। नई व्यवस्था के तहत एक-दो दिनों में समितियों से किसानों को निजी कंपनी की डीएपी मिलनी शुरू हो जाएगी।
वर्तमान में रबी का सीजन चल रहा है। गेहूं व आलू की बोआई में सबसे अधिक मांग डीएपी की है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से खबर आ रही है कि पर्याप्त डीएपी नहीं मिल पा रही है। छोटे व बड़े सभी किसानों को केवल दो बोरी ही डीएपी दी जा रही है। हालांकि विभाग का दावा है कि जोत के आधार पर डीएपी वितरण का निर्देश दिया गया है। समितियों से पर्याप्त डीएपी नहीं मिल पाने के कारण किसान निजी दुकानों का सहारा ले रहे हैं। रविवार को जिले में नंदगंज में एचयूआरएल (हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड) कंपनी की एक रैक डीएपी उतारी गई। 536 मीट्रिक टन डीएपी से 353 मीट्रिक टन सहकारी समितियों को भेजा जाएगा। जबकि 173 मीट्रिक टन डीएपी उर्वरकों के निजी दुकानों पर वितरित की जाएगी।
दो लाख हेक्टेयर में होती है खेती
गाजीपुर। जनपद में साढ़े पांच लाख किसान हैं। वहीं दो लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की खेती होती है। जिले में कुल साधन सहकारी समितियों की संख्या 182 है। जबकि सक्रिय समितियों की संख्या 154 है। इसी तरह खाद विक्रेता दुकानों की संख्या 800 है। जबकि सक्रिय खाद विक्रेता दुकानें 550 है।
निजी कंपनियों की डीएपी का 30 प्रतिशत हिस्सा समितियों के माध्यम से वितरित की जाएगी। एक-दो दिनों में समितियों के जरिए किसानों को हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड कंपनी की डीएपी मिलनी शुरू हो जाएगी। उमेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी