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पुण्यतिथि पर कारगिल शहीद रामदुलार को किया नमन

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मुहम्मदाबाद। कारगिल में शहीद हुए रामदुलार यादव की 19वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को उनके पैतृक गांव पड़ैनिया स्थित शहीद उद्यान में शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि पूर्वांचल के वीरों ने हमेशा देश में क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सभी लोग एक दिन मरते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसा कीर्तिमान बनाकर जाते हैं कि उनके जाने के बाद भी लोग उन्हें काफी याद करते हैं। कहा कि शहीदों की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। कहा कि कारगिल युद्ध में जिले के 17 जवानों ने अपनी कुर्बानी दी है। उन्होंने शहीद के माता-पिता, जिन्होंने रामदुलार जैसे बहादुर सैनिक को जन्म दिया एवं शहीद की पत्नी प्रमिला यादव की सराहना करते हुए कहा कि मैं शहीद के परिवार एवं गांव के लोगों को धन्यवाद करूंगा कि उन्होंने रामदुलार यादव की शहादत को जीवंत रखा है।
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कहा कि शहीद किसी धर्म, जाति का नहीं होता। राष्ट्र के लिए जान देने वाले लोग अमर हो जाते हैं। श्री अंसारी ने 18 अगस्त 1942 को अमर शहीद शिवपूजन राय के नेतृत्व में शहीद होने वाले अष्ट शहीदों को नमन करते हुए कहा कि शहीदों की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। इनके प्रति आस्था-निष्ठा रखने जरूरत है, भुनाने की नहीं। इसे किसी पार्टी का कार्यक्रम बनाने से अधिकांश लोग इससे किनारा करते जा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों को आयोजकों द्वारा बड़े दिल से और बड़े पैमाने पर आयोजित कर उसमें सभी को बुलाना चाहिए। ताकि शहीदों की कुर्बानियों के अनुरूप उन्हें सम्मान मिल सके। पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार 2027 तक संविधान को पूरी तरह बदलने में लगी है। इसके लिए पिछड़े, अल्पसंख्यक एवं दलित समुदाय को सतर्क रहना होगा। गायक नंदलाल रवि ने अपने गीतों के माध्यम से शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शहीद की प्रतिमा को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में शहीद के पिता रामनगीना यादव, उनकी पत्नी प्रमिला यादव, पूर्व एमएलसी काशीनाथ सिंह यादव, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुदर्शन सिंह यादव, रामधारी सिंह यादव, ब्लाक प्रमुख रामकृत सिंह यादव, पूर्व प्रमुख रामायण सिंह यादव, बलिराम पटेल, फेंकू सिंह यादव, अजय यादव, विक्रमा यादव, रामअवतार शर्मा आदि प्रमुख थे। अध्यक्षता सुबेदार ह्रदयनरायन यादव एवं संचालन शंभू सिंह अकेला ने किया। अंत में शहीद के भाई राजेंद्र यादव ने आभार प्रकट किया।
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